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600 करोड़ के पोंजी घोटाले में 3 डायरेक्टर भगोड़े घोषित, जानिए मामला क्या है

Fri, 06 Apr 2018 04:08 PM IST
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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घोटाला - फोटो : amar ujala
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600 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले में चंडीगढ़ बेस मलयेशियाई कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी के तीन डायरेक्टरों को वीरवार को भगोड़ा (पीओ) घोषित कर दिया। अदालत ने यह आदेश आरोपियों को कई बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश न होने पर दिए हैं। भगोड़ा घोषित होने वालों में कंपनी के डायरेक्टर सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी अमाल राज और राम कृष्णामूर्ति हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।
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वहीं, मलयेशिया में रह रहे एक डायरेक्टर मुगुनधन गंगम को फिलहाल गृह मंत्रालय के जरिए समन भेजे गए थे, जो उन्हें अब तक सर्व नहीं हुए हैं। समन रिसीव न होने पर अदालत उसके खिलाफ भी पीओ प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इस प्रक्रिया के बाद घोटाले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी कमल बक्शी के खिलाफ केस का ट्रायल शुरू हो सकेगा। 3 नवंबर, 2017 को जिला अदालत ने कंपनी के डायरेक्टर मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति को  समन जारी कर 28 नवंबर को अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे।

ईडी के अनुसार आरोपी चेन्नई, बंगलूरू और मलयेशिया में थे, लेकिन जब उनकी गिरफ्तारी के लिए रेड की गई तो सब फरार मिले थे। इसके बाद 13 दिसंबर को जिला अदालत ने डायरेक्टरों को भगोड़ा करार देने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए थे।
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सितंबर में दायर हो गई थी चार्जशीट
27 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कंपनी के सभी डायरेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। दो हजार पेज की चार्जशीट में ईडी ने कंपनी के डायरेक्टरों के खिलाफ मनी लांड्रिंग अधिनियम 45 के तहत उन्हें आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ केस में करीब सौ गवाह बनाए गए हैं। डायरेक्टरों में मुगुनधन गंगम, सेलाथुराई भास्कर, चेलाधुरी, अमाल राज, राम कृष्णामूर्ति और कमल कुमार बक्शी के नाम शामिल हैं। इनमें से केवल कमल बक्शी ही गिरफ्तार है। ईडी ने आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 के अधिनियम 3, 4 के तहत भी आरोप पत्र दायर किया था।

गुरदासपुर में दर्ज है बक्शी पर केस, गुरुग्राम से पकड़ा
ईडी ने 29 जुलाई, 2017 को पोंजी घोटाले की जांच के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में रेड की थी। इस दौरान कंपनी का एजेंट और चंडीगढ़ निवासी कमल बक्शी जो सेक्टर-36 थाना पुलिस में दर्ज एक मामले में भगोड़ा है, उसे गुरुग्राम से पकड़ा था। वह इस घोटाले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ पानीपत और गुरदासपुर में भी केस दर्ज हैं। ईडी ने रेड के बाद आरोपी की 4.18 करोड़ रुपये की संपत्ति भी सीज की थी। वहीं ईडी के अनुसार इस घोटाले का मास्टरमाइंड मलयेशिया निवासी मुगुनधन गंगम है और वह वहीं छिपा हुआ है।

यह है मामला
चंडीगढ़ बेस मलयेशियाई कंपनी यूनीपेय टूयू मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और यूनीगेटवे ट्रेडिंग कंपनी एक तय फीस के बाद ऑनलाइन सदस्य बनाती थी। कंपनी उन्हें डिजिटल वॉलेट की सुविधा उपलब्ध करवाती थी। कंपनी में देशभर से हजारों लोगों ने करोड़ों रुपये लगाए थे। शुरुआत में कंपनी ने लोगों को बहुत मोटा रिटर्न दिया। इससे लोगों का विश्वास कंपनी में बढ़ा तो उन्होंने और पैसा लगाया। कंपनी ने अक्तूबर 2010 में निवेशकों को महीने के महीने मिलने वाले रिटर्न को देना बंद कर दिया था। इससे निवेशकों से 600 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई।
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