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Chandigarh News: ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 3.66 करोड़ की ठगी में तीन दबोचे

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चंडीगढ़। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग व शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर 3 करोड़ 66 लाख 25 हजार की ठगी के मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने राजस्थान निवासी महेश जांगिड़ निवासी सेक्टर-2 हाउसिंग बोर्ड जोधपुर, विशाल गौड़ निवासी विजय नगर जिला जोधपुर व हेमंत प्रजापति निवासी गंगा विहार बासनी, वन फेस, जोधपुर राजस्थान के रूप में हुई है। आरोपियों को अदालत में पेशकर हेमंत का एक दिन का दोबारा रिमांड लिया गया है, जबकि महेश और विशाल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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जानकारी के मुताबिक सेक्टर-49 के रहने वाले 68 साल के सुरिंदर कुमार ठाकुर ने पुलिस को शिकायत दी थी कि फरवरी 2024 में उसका मोबाइल नंबर पी-15 स्टॉक मार्केट एक्सचेंज क्लब व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल किया गया। इसके बाद एक युवती ने फोन कर बातचीत करनी शुरू कर दी। उसे स्टॉक ट्रेडिंग में पैसे निवेश कर दोगुना लाभ के बारे में बताया गया। उसने उनकी बातों में आकर 3 करोड़ 66 लाख 25 हजार रुपये निवेश कर किए लेकिन बाद में आरोपियों ने अपने फोन स्विच ऑफ कर लिए। साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद विशेष जांच टीम बनाई गई। पुलिस ने बीते शनिवार को जोधपुर में छापेमारी कर महेश जांगिड़, विशाल गौड़ और हेमंत को गिरफ्तार कर लिया।
बैंक खाते से खुली पोल

पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल खंगाली तो भारी-भरकम राशि के ट्रांजेक्शन का पता चला। महेश के खाते में 9.80 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इनमें करीब 5 लाख रुपये विवादित राशि से संबंधित बताए गए हैं, जबकि विशाल गौड़ का बैंक खाता महेश ने खुलवाया था। आरोपी ने पहले लालच देकर विशाल गौड़ के खाते में पैसे जमा करवाए। फिर उसके खाते में आए पैसों में से 20 प्रतिशत देकर बाकी रकम महेश ने चेक के माध्यम से निकलवा ली। विशाल ने खुलासा किया कि हेमंत के कहने पर ही एक्सिस बैंक में खाता खोला गया था। हेमंत ने बताया कि वह क्रिप्टो करंसी ट्रेडिंग का काम करता है। उसने यूएसडीटी ट्रेडिंग के लिए एक बाइनेंस अकाउंट बनाकर उसका खरीदारी के लिए इस्तेमाल करता था।
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जोधपुर के ई-मित्र सेंटर से चल रहा था ठगी का पूरा नेटवर्क
चंडीगढ़। करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी का यह पूरा खेल जोधपुर (राजस्थान) के गंगा विहार बासनी के सरकारी ई-मित्र कंप्यूटर सेंटर से चल रहा था। 3.66 करोड़ की ठगी के मामले में पकड़ा गया आरोपी हेमंत प्रजापति के नाम पर ही यह पंजीकृत है, जहां वह लोगों के विभिन्न तरह के सरकारी प्रमाणपत्र बनाने का काम करता था। इस ठगी के तार केवल राजस्थान से ही नहीं बल्कि केरल समेत अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं लेकिन पिछले कई दिनों से केरल के वायनाड में आई बाढ़ के चलते पुलिस टीम वहां के लिए रवाना नहीं हो सकी है। इस मामले में अब तक करीब एक दर्जन आरोपियों की डिटेल पुलिस टीम को मिल चुकी है।
रिमांड के दौरान आरोपी हेमंत ने पुलिस को बताया कि किस तरह से वह लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाता था। उसने बताया कि सबसे पहले वह और उसके साथी ऑनलाइन वेबसाइट से लोगों का डाटा निकालते थे और उन्हें व्हाट्सअप पर मैसेज भेजते थे। एसएमसीएलई ट्रेडिंग एप के जरिए वे लोगों को निवेश और ट्रेडिंग के लिए फंसाते थे। उन्होंने https://www.wsifhuhn.com नामक वेबसाइट भी बनाई थी और इस वेबसाइट को एसएमसीएलई एप के साथ जोड़ रखा था।
आरोपी ने यह भी बताया कि एसएमसीएलई ग्लोबल सिक्योरिटीज लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, जो सेबी के साथ पंजीकृत है। आरोपी ने खुलासा किया कि वह ई-मित्र कंप्यूटर सेंटर में लोगों के प्रमाणपत्र बनाने के अलावा ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए लोगों के अलग-अलग कंपनियों में पैसे निवेश करवाने का लालच देकर उन्हें ठगता था। वह खुद शादीशुदा है जबकि उसके दोनों अन्य साथी अभी अविवाहित हैं। उसने इस ठगी के अलावा भी अन्य कई लोगों के साथ इसी तरह से ठगी की है।

जांच टीम की राह में बरसात का रोड़ा
सूत्रों के मुताबिक, साइबर क्राइम थाना की टीम द्वारा की गई जांच के दौरान कुछ बैंक खाते केरल के भी निकले। केरल में अलग-अलग लोगों के खातों में इसी ठगी के रुपये ट्रांसफर हुए हैं। बाकायदा आलाधिकारियों ने जांच टीम को केरल जाकर आरोपियों को गिरफ्तार करने संबंधित आदेश भी दे रखे हैं लेकिन पिछले कई दिनों से केरल के वायनाड में भारी बारिश व बाढ़ के चलते जांच टीम वहां रवाना नहीं हो पा रही है। इसके अलावा जांच में कुछ मोबाइल नंबर व बैंक खातों के अलावा घर के पते भी फर्जी निकले हैं क्योंकि जिन खातों में पैसे ट्रांसफर हुए थे, उनके साथ लिंक मोबाइल नंबर व घर के पते ही फर्जी निकले हैं। हालांकि जांच टीम के मुताबिक इस मामले में अभी कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना बाकी है।
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