डॉ. बेदी ने बताया कि इस बार विश्व टीबी दिवस की थीम द क्लॉक इज टिकिंग यानी समय गुजर रहा है, तय की गई है। इसका अर्थ है कि समय के साथ ही टीबी के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में जरूरी है कि कोविड-19 के साथ ही टीबी पर काबू के लिए भी प्रयास पूर्ववत जारी रहे, जिससे टीबी उन्मूलन के 2025 के लक्ष्य को जल्द पूरा करने में सफलता मिल सके।
ये लक्षण हैं खतरनाक
3 हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी आना, खांसी में खून आना, सीने में दर्द या सांस लेने व खांसने में दर्द होना, लगातार वजन कम होना, चक्कर आना, रात में पसीना आना, ठंड लगना, भूख न लगना।
बीमारी होने व फैलने के मुख्य कारण
टीबी हवा के माध्यम से फैलने वाली बीमारी है। इसके अलावा कुछ और भी मुख्य कारण है जिससे व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है। इसमें मुख्य रूप से एचआईवी, एड्स, मधुमेह, किडनी की बीमारी, कैंसर और अंग प्रत्यारोपण के बाद दी जाने वाली दवाइयां व कुपोषण शामिल है।
मुफ्त इलाज की है सुविधा
टीबी का इलाज सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है। इसके लिए जरूरी है कि टीबी का पूरी तरह इलाज करवाया जाए। बीच में दवा छोड़ देने से बैक्टीरिया में दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और इसका इलाज मुश्किल हो सकता है।