फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: पीजीआई के हजारों कर्मियों को हाईकोर्ट से राहत, प्रमोशन का रास्ता साफ

Wed, 31 May 2023 12:52 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जस्टिस मनोज बजाज ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश का पीजीआई को पालन न करने का आदेश दिया है। ऐसे में कर्मियों की पदोन्नति के लिए आयोजित होने वाली डीपीसी का रास्ता हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है।
विज्ञापन
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पीजीआई चंडीगढ़ में कार्यरत हजारों कर्मियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के 10 जनवरी 2023 के फैसले पर फिलहाल अमल न करने का आदेश दिया है। आयोग ने इस आदेश के जरिये पीजीआई में कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। पीजीआई इंप्लाइज यूनियन ने एडवोकेट करण सिंगला के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के 10 जनवरी के आदेश को चुनौती दी है। 

विज्ञापन


याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि आयोग के समक्ष एक शिकायत पहुंची थी जिसमें कहा गया था कि पीजीआई में प्रमोशन के दौरान आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को कमेटी बनाते हुए नए सिरे से रोस्टर तैयार करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही यह प्रक्रिया पूरी होने तक पीजीआई में कोई पदोन्नति न हो इसके लिए डीपीसी की बैठक आयोजित न करने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर यह आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट इस बारे में स्पष्ट कर चुका है कि आयोग सेवा से जुड़े मामलों में अदालत के रूप में सुनवाई नहीं कर सकता है। इसके साथ ही यह भी बताया कि शिकायतकर्ता को आयोग के समक्ष याचिका दाखिल करने का अधिकार ही नहीं था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

पीजीआई कर्मचारी संघ (गैर-संकाय) ने इस मामले को पीजीआई प्रशासन के समक्ष भी उठाया। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में इस विषय को लेकर आयोग के निर्णयों की प्रति मांगी गई जो प्रदान की गई लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। याची पक्ष ने हाईकोर्ट को बताया कि विभिन्न संवर्गों में 300 से अधिक श्रेणियों में हजारों पद रिक्त पड़े हैं। 

आयोग के इस अवैध और मनमाने आदेश के कारण इन पदों पर कर्मी काम नहीं कर पा रहे हैं जिसका खामियाजा मरीजों समेत अन्य को भी भुगतना पड़ रहा है। याची ने पीजीआई प्रबंधन से गुहार लगाई और पदोन्नति के लिए डीपीसी की बैठक बुलाने की मांग की लेकिन ऐसा नहीं किया गया। याची ने दलील दी कि आयोग का यह निर्णय कर्मियों के पदोन्नति के मौलिक अधिकार का हनन है और ऐसे में इसे खारिज किया जाए। 

जस्टिस मनोज बजाज ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश का पीजीआई को पालन न करने का आदेश दिया है। ऐसे में कर्मियों की पदोन्नति के लिए आयोजित होने वाली डीपीसी का रास्ता हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें