फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी... से बांधा समा

विज्ञापन
विज्ञापन
टैगोर थिएटर में महफिल-ए-म्यूजिक का आयोजन, लता मंगेशकर और जगजीत सिंह को समर्पित रही सुरों की शाम
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी... जगजीत सिंह की इस यादगार गजल के सुर गूंजे तो श्रोता संगीत की दुनिया में खो गए। कहीं लता मंगेशकर के सदाबहार नगमों की मिठास थी, तो कहीं गजलों और भक्ति गीतों ने माहौल को सुरमय बना दिया। टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में शनिवार को सरगम सोसाइटी ऑफ इंडियन म्यूजिक एंड आर्ट की ओर से महफिल-ए-म्यूजिक का आयोजन किया गया। यह शाम लता मंगेशकर और जगजीत सिंह को समर्पित रही। इसमें स्थापित गायकों के साथ चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी से प्रशिक्षित युवा कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।
नवरात्र के अवसर पर डॉ. कोमल चुघ ने मेरे कंठ बसो महारानी और जगदीश्वरी सर्वेश्वरी जैसे भक्ति गीतों से कार्यक्रम की शुरुआत की। सुशील नागपाल ने जगजीत सिंह का गीत कौन आएगा यहां सुनाया। उन्होंने प्रियंका के साथ गम का खजाना तेरा भी है मेरा भी और पहले तो अपने दिल की लगी जान जाइए जैसे युगल गीत पेश किए। प्रियंका ने चित्रा सिंह की गजल कभी तो खुल के बरस से वाहवाही बटोरी।
विज्ञापन

चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी से प्रशिक्षित सुखमनी ने मंजिल ना दे चिराग ना दे हौसला तो दे, जसरीत ने वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी और ममता गैरी चावला ने तुमको देखा तो ये ख्याल आया गीत सुनाया। युवा गायिका नैन्सी ने लता मंगेशकर की गजल रस्म-ए-उल्फत को निभाएं तो निभाएं कैसे प्रस्तुत की।
विज्ञापन

गजलों और युगल गीतों से सजी शाम
संगीतकार, गायक और रेडियो-टीवी कलाकार आरडी कैले ने मिर्जा गालिब की गजल न था कुछ तो खुदा था और आते-आते मेरा नाम सा रह गया सुनाई। इसके बाद उन्होंने डॉ. कोमल चुघ के साथ जब से हम तबाह हो गए, सोचा नहीं अच्छा-बुरा और बल्ले-बल्ले जैसे युगल गीत पेश किए। सरगम सोसाइटी के संरक्षक मोहिंदर पॉल गुप्ता ने बताया कि संस्था भारतीय संगीत और कला को बढ़ावा देने के लिए विषय आधारित कार्यक्रम आयोजित करती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें