हृदय में रक्त की सबसे ज्यादा सप्लाई लेफ्ट मेन कोर्नरी आर्टरी से होती है। यदि इसमें ब्लॉकेज आ जाएं तो खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। आमतौर पर इसका इलाज बाइपास सर्जरी से किया जाता है।
इसके परिणाम बेहतर होते हैं, लेकिन इसमें मरीज की रिकवरी काफी देरी से होती है। दो महीने भी लग जाते हैं। अब इस बीमारी में बाइपास सर्जरी के बजाए रिवर्स क्रश तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
इस तकनीक का इस्तेमाल देश में चुनिंदा ही संस्थान करते हैं। इनमें चंडीगढ़ का पीजीआई भी शामिल है।
पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिव बग्गा ने बताया कि इस तकनीक का इस्तेमाल करने से मरीज की रिकवरी काफी तेजी से होती है।
एक से दो दिन के भीतर मरीज की छुट्टी कर दी जाती है। इससे समय की बचत तो होती है साथ ही मरीजों का रुपया भी बचता है। अब तक इस तकनीक से 200 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इसके रिजल्ट बाइपास सर्जरी से बेहतर हैं।
युवाओं में किया जाता है प्रयोग
डॉ. शिव बग्गा ने बताया कि रिवर्स क्रश तकनीक का प्रयोग सबसे ज्यादा युवाओं में किया जाता है, ताकि वे बहुत ही कम समय अस्पताल में बिता पाएं।
तकनीक का इस्तेमाल देश के चुनिंदा हॉस्पिटल ही करते हैं। इनमें एस्कार्ट, मेदांता और एम्स जैसे संस्थान शामिल है। पीजीआई के डॉक्टर शिव बग्गा और श्री निवास रेड्डी ने यह विधि कोरिया में साल 2009 में सीखी थी।
उन्होंने बताया कि इस विधि का इस्तेमाल सभी लोगों पर नहीं किया जाता है। खासकर उन लोगों में जिनमें शुगर की प्राब्लम होती है। उन्हें इस विधि से बाहर रखा जाता है।