ऑपरेशन ब्लू स्टार को जानने से पहले उन परिस्थतियों को जानना जरूरी है, जिसके कारण ये हालात पैदा हुए। पंजाब में हिंसा की शुरुआत 1978 में हुई थी। उसी समय सिख धर्म प्रचार संस्था के प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरांवाले का नाम चर्चा में आया।
1981 के बाद जब पंजाब में हिंसक गतिविधियां बढ़ने लगीं तो भिंडरांवाले के ख़िलाफ लगातार हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगने लगे, लेकिन पुलिस का कहना था कि उनके ख़िलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
अप्रैल 1983 में पंजाब पुलिस के उपमहानिरीक्षक एएस अटवाल की दिन दिहाड़े हरमंदिर साहिब परिसर में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस का मनोबल लगातार गिरता चला गया। लोगों का नरसंहार होता देखकर इंदिरा गांधी सरकार ने पंजाब में दरबारा सिंह की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।
पंजाब में स्थिति बिगड़ती चली गई। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार से तीन महीने पहले तक हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 298 हो चुकी थी। (साभार: विकिपिडिया)
एक जून 1984 से हुई थी शुरुआत
ऑपरेशन ब्लू स्टार
- फोटो : फाइल फोटो
ऑपरेशन ब्लू स्टार के हालात एक जून से ही बनने शुरू हो गए थे। एक जून को स्वर्ण मंदिर परिसर और उसके बाहर तैनात केंद्र रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स के बीच गोलीबारी हुई थी। स्वर्ण मंदिर परिसर में हथियारों से लैस संत जरनैल सिंह, कोर्ट मार्शल किए गए मेजर जनरल सुभेग सिंह और सिख स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के लड़ाकों ने चारों तरफ़ खासी मोर्चाबंदी कर रखी थी।
तीन जून को गुरु अर्जुन देव के शहीदी दिवस को लेकर हज़ारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जमा थे। उधर, तीन जून तक ही भारतीय सेना अमृतसर में प्रवेश कर गई थी और स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर चुकी थी। शाम में कर्फ़्यू लगा दिया गया था।चार जून को सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी ताकि चरमपंथियों के हथियारों और असले का अंदाज़ा लगाया जा सके।
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5 जून 1984 का था काला दिन
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स्वर्ण मंदिर परिसर को बाहर से सेना ने चारों ओर से घेर रखा था। उधर, स्वर्ण मंदिर परिसर में हथियारों से लैस संत जरनैल सिंह, कोर्ट मार्शल किए गए मेजर जनरल सुभेग सिंह और सिख स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन के लड़ाकों ने मोर्चाबंदी कर रखी थी।
इंदिरा गांधी ने सेना को स्वर्ण मंदिर परिसर में घुसने और ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाने का आदेश दे दिया। जिसके बाद वहां परिसर में भीषण खून-खराबा हुआ।
सैन्य कमांडर केएस बराड़ ने माना कि चरमपंथियों की ओर से भी काफी तीखा जवाब मिला। अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया। स्वर्ण मंदिर पर भी गोलियां चलीं। कई सदियों में पहली बार वहां छह, सात और आठ जून को पाठ नहीं हो पाया। सिख पुस्तकालय जल गया।
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ऑपरेशन ब्लूस्टार: 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल
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भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार, ऑपरेशन ब्लू स्टार में 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। इसी श्वेतपत्र के अनुसार 493 चरमपंथी या आम नागरिक मारे गए, 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया, लेकिन इन सब आंकड़ों को लेकर अब तक विवाद चल रहा है। सिख संगठनों का कहना है कि हज़ारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे और मरने वाले निर्दोष लोगों की संख्या भी हज़ारों में है। इसका भारत सरकार खंडन करती आई है।
इस कार्रवाई से सिख समुदाय की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंची। कई प्रमुख सिख बुद्धिजीवियों ने सवाल उठाए कि स्थिति को इतना ख़राब क्यों होने दिया गया कि ऐसी कार्रवाई करने की ज़रूरत पड़ी? सरकार की इस बर्बर कार्रवाई से खफा कई प्रमुख सिखों ने या तो अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया या फिर सरकार द्वारा दिए गए सम्मान लौटा दिए।
सिखों और कांग्रेस पार्टी के बीच दरार उस समय और गहरा गई जब दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने कुछ ही महीने बाद 31 अक्तूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी। इसके बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से कांग्रेस और सिखों की बीच की खाई और गहरा गई।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार का देखिए, ब्रिटेन कनेक्शन
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तीस वर्ष पुराने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार पर ब्रिटेन के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रैचर ने स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी आतंकियों से मुक्त कराने की सैन्य कार्रवाई में भारत की मदद की।
हालांकि ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने ब्रिटेन की किसी भूमिका से इंकार किया है, लेकिन 30 वर्षों की अवधि के बाद गोपनीयता कानून से बाहर आए इन साक्ष्यों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती।
भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के पूर्व अधिकारी बी. रमन की पुस्तक ‘द काउबायेज ऑफ आर एंड डब्लू’ से उद्घाटित हो चुका है कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के तत्कालीन सलाहकार आरएन काव के अनुरोध पर ब्रिटिश सुरक्षा सेवा के दो अधिकारियों ने पर्यटक के तौर पर स्वर्ण मंदिर का दौरा किया था।
ब्रिटेन कनेक्शन सामने आने से गरमा गई थी सियासत
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ब्रिटेन के लोकप्रिय समाचार पत्र ‘गार्जियन’ का कहना है कि अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के पूरा होने के बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रैचर ने इंदिरा गांधी के प्रति पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए एक निजी नोट भेजा था।
इस नोट में कहा गया है कि पृथक सिख राष्ट्र की मांग की पृष्ठभूमि में ब्रिटेन भारत की अखंडता का पूरा समर्थन करता है। यह नोट 20 जून 1984 को भेजा गया था, लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन के विशेष सुरक्षा बल की भूमिका से इनकार किया है।
उनका कहना है कि अभी तक इसका पुख्ता सबूत नहीं मिला है, लेकिन चूंकि ब्रिटेन में सिख समुदाय की भारी आबादी है और विपक्षी दल चुनाव में इस मसले को चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं लिहाजा उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रैचर की भूमिका की जांच का आदेश दे दिया है। इस खुलासे से भारत और ब्रिटेन की सियासत गरमा गई।