मांगों को लेकर केंद्र के साथ वार्ता के बीच किसान की मौत से शंभू बार्डर पर शुक्रवार को हालात एक बार फिर तनावपूर्ण बन गए हैं। खास तौर से बार्डर पर डटे नौजवानों में अपने एक बुजुर्ग किसान की शहादत से रोष व्याप्त है। इसी के चलते इन नौजवानों ने शुक्रवार को आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो उधर से हरियाणा पुलिस प्रशासन की तरफ से हवा में प्लास्टिक की गोलियां चलाई गईं और आंसू गैस के गोले भी फेंके गए। यह दो से तीन बार हुआ। हालांकि इस दौरान कोई घायल नहीं हुआ।
लगातार मंच से भी इन नौजवानों को आगे न बढ़ने की अपील की जाती रही, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। केंद्र की तरफ से मांगों को लेकर बैठक का न्यौता मिलने के बाद किसानों ने बुधवार शाम से शंभू बार्डर पर आगे बढ़ने की कार्रवाई रोक रखी थी। किसान जत्थेबंदियों ने बार्डर से करीब एक किलोमीटर पहले ही लक्ष्मण रेखा के रूप में एक रस्सी भी लगा दी थी, जिसे आगे निकलने को नौजवानों को मना किया गया था। शुक्रवार सुबह गुरदासपुर के किसान ज्ञान सिंह (70) की पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल में मौत की खबर के बाद से बार्डर पर डटे किसानों में रोष बढ़ गया।
इस मौके पर जगह-जगह किसानों की ओर से महिलाओं की मदद से लंगर तैयार किए जा रहे थे। आसपास के इलाकों से लोग भी लंगर लेकर बार्डर पर पहुंच रहे थे। कुछ लोग किसानों के लिए उनकी जरूरत का सामान भी ला रहे थे। महिलाओं की भी आंदोलन में पूरी भागीदारी है। वह लंगर बनाने के साथ अपने गीतों व नारों से किसानों में जोश भरने का काम कर रही हैं। इस दौरान मंच से किसान नेता अपने संबोधन में नौजवानों को लगातार शांत रहते हुए आंदोलन को जीत दिलाने की अपील करते नजर आए।
नौजवान किसान मनजीत सिंह ने कहा कि बुजुर्ग किसान की मौत से बहुत दुखी हैं। लेकिन यह शहादत व्यर्थ नहीं जाने देंगे। अब मांगें मनवा कर ही घर वापस लौटेंगे। वहीं उपिंदर सिंह ने कहा कि बुजुर्ग किसान ज्ञान सिंह सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो 70 साल की उम्र में भी किसानों के हक में आवाज बुलंद करने को बार्डर पहुंचे व जान गंवा दी। अब उनके नक्शे कदम पर चलते सभी नौजवान मांगों को लेकर और दमदार तरीके से आवाज उठाएंगे। आंदोलन मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा।
जारी रहा मोर्चा, तो और होंगी शहीदियां
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बात करते कहा कि अगर यह मोर्चा इसी तरह से जारी रहा, तो और शहीदियां होंगी। लेकिन किसान शहादत देने से नहीं डरते हैं। उनकी सभी मांगें जायज हैं। इसलिए केंद्र सरकार या तो उनकी मांगों को बैठकर जल्द हल कर दे या फिर दिल्ली कूच करने दे। पंधेर ने साफ किया कि दिल्ली मोर्चा लगाने के फैसले पर वह कायम हैं। केवल बातचीत के लिए फिलहाल रूके हैं।
किसान आंदोलन में अब तक 400 घायल, 70 गंभीर - पंधेर
किसान आंदोलन 2.0 में अब तक 400 घायल हो चुके हैं, जिनमें से 70 गंभीर है। फिलहाल यह सभी गंभीर घायल किसान पटियाला, राजपुरा समेत अन्य अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने शंभू बार्डर पर बातचीत में आरोप लगाया कि किसानों की आवाज दबाने के लिए केंद्र की ओर से 70 सोशल मीडिया अकाउंट बंद कर दिए गए हैं। जिनमें कईं किसान नेताओं व उनके हक में आवाज उठाने वालों के अकाउंट हैं। लेकिन केंद्र की यह साजिश नाकाम होगी। किसान अपनी जायज मांगें मनवा कर ही रहेंगे।
पंधेर ने बताया कि वीरवार रात को हुई बैठक में किसानों की तरफ केंद्रीय मंत्रियों के सामने एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कर्जा माफी की मांगों को जोरदार ढंग से उठाया गया है। उम्मीद है कि रविवार को होने वाली बैठक सफल रहेगी और किसानों की सभी मांगों को हल किया जाएगा।
पंधेर ने आरोप लगाया कि बुधवार बाद दोपहर जब केंद्र की तरफ से बातचीत का न्यौता मिला, तो किसानों की तरफ से आगे बढ़ने की कार्रवाई रोक दी गई थी। बावजूद इसके हरियाणा की तरफ से ढाई घंटे आंसू गैस के गोले दागे जाते रहे। पंधेर ने चेतावनी दी कि किसानों को उकसाने की कोशिश केंद्र न करे।
उन्होंने साफ किया कि किसानों के मंच पर किसी भी सियासी पार्टी को समर्थन नहीं दिया जाएगा। क्योंकि बीते 75 सालों में किसी भी सरकार ने किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया। इसलिए केंद्र सरकार गलत आरोप लगा कर किसानों की छवि को धूमिल करने का प्रयास न करे। पंधेर ने हिरासत में लिए किसानों की रिहाई की भी मांग की।