12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे पर दुनिया इस साल फ्लोरेंस नाइटेंगल की 200वीं जयंती मना रही है। डब्ल्यूएचओ ने इस वर्ष को नर्सेज एंड मिडवाइव्स ईयर घोषित किया है। फ्लोरेंस नाइटेंगल के सपने को साकार करते हुए कोरोना से इस जंग में चंडीगढ़ के नर्स योद्धा के रूप में निष्ठा से अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। इस नर्सेज डे पर अमर उजाला आपको कुछ ऐसे नर्सिंग स्टाफ से रूबरू करा रहा है, जिन्होंने अपने ड्यूटी को पूरा करने के साथ ही अपने सहयोगियों की समस्याओं के समाधान के लिए जी जान लगाया हुआ है।
अपनी कमजोरी को बनाई ताकत
राजस्थान के भरतपुर निवासी सत्यवीर सिंह डागर पीजीआई में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। 2017 में इन्हें पीजीआई नर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन का महासचिव चुना गया। अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान इन्होंने नर्सिंग स्टाफ की कई समस्याओं का समाधान कराया। दिव्यांग होने के बावजूद इन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दी। लगातार 12 सालों से पीजीआई के इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे हैं। जहां अन्य यूनिट की तुलना में सबसे ज्यादा मरीजों का दबाव रहता है।
सत्यवीर की पत्नी कल्पना भी पीजीआई में ही नर्सिंग ऑफिसर हैं। दोनों मिलकर कोरोना महामारी के इस दौर में अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। सत्यवीर के प्रयासों का ही परिणाम है कि पीजीआई में नर्सिंग स्टाफ के जिस ड्यूटी रोस्टरिंग चार्ट से समस्या आ रही थी, उसमें बदलाव किया गया। इसके साथ ही छटे पे कमीशन को दूर कराकर पीजीआई के लगभग 1700 नर्सिंग स्टाफ को लाभान्वित कराया। सत्यवीर की दो बेटियां नव्या और सुनिधि हैं।