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World Nurses Day: कोरोना के ये योद्धा 'फ्लोरेंस नाइटेंगल' के सपने को कर रहे हैं साकार

Tue, 12 May 2020 01:08 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो वीणा तिवारी, चंडीगढ़
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सांकेतिक चित्र
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12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे पर दुनिया इस साल फ्लोरेंस नाइटेंगल की 200वीं जयंती मना रही है। डब्ल्यूएचओ ने इस वर्ष को नर्सेज एंड मिडवाइव्स ईयर घोषित किया है। फ्लोरेंस नाइटेंगल के सपने को साकार करते हुए कोरोना से इस जंग में चंडीगढ़ के नर्स योद्धा के रूप में निष्ठा से अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। इस नर्सेज डे पर अमर उजाला आपको कुछ ऐसे नर्सिंग स्टाफ से रूबरू करा रहा है, जिन्होंने अपने ड्यूटी को पूरा करने के साथ ही अपने सहयोगियों की समस्याओं के समाधान के लिए जी जान लगाया हुआ है।
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अपनी कमजोरी को बनाई ताकत
राजस्थान के भरतपुर निवासी सत्यवीर सिंह डागर पीजीआई में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हैं। 2017 में इन्हें पीजीआई नर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन का महासचिव चुना गया। अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान इन्होंने नर्सिंग स्टाफ की कई समस्याओं का समाधान कराया। दिव्यांग होने के बावजूद इन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दी। लगातार 12 सालों से पीजीआई के इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे हैं। जहां अन्य यूनिट की तुलना में सबसे ज्यादा मरीजों का दबाव रहता है।

सत्यवीर की पत्नी कल्पना भी पीजीआई में ही नर्सिंग ऑफिसर हैं। दोनों मिलकर कोरोना महामारी के इस दौर में अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। सत्यवीर के प्रयासों का ही परिणाम है कि पीजीआई में नर्सिंग स्टाफ के जिस ड्यूटी रोस्टरिंग चार्ट से समस्या आ रही थी, उसमें बदलाव किया गया। इसके साथ ही छटे पे कमीशन को दूर कराकर पीजीआई के लगभग 1700 नर्सिंग स्टाफ को लाभान्वित कराया। सत्यवीर की दो बेटियां नव्या और सुनिधि हैं।
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चंडीगढ़ के फ्लोरेंस नाइटेंगल हैं शोभना

जीएमएसएच-16 के नर्सिंग सिस्टर इंचार्ज शोभना पठानिया असल में चंडीगढ़ की फ्लोरेंस नाइटेंगल हैं। वह 30 साल से लगातार मरीजों की सेवा में लगी हैं। मौजूदा समय में वह कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के बीच ड्यूटी कर रहीं है। इसी साल 14 फरवरी को बड़ी ओपन सर्जरी होने के बावजूद इन्होंने कोरोना महामारी के दौरान घर और रहना उचित नहीं समझा और अपनी ड्यूटी ज्वाइन की।

परिवार और अस्पताल के बीच सामंजस्य स्थापित कर शोभना अपनी सहयोगी की समस्याओं को दूर करने का भरपूर प्रयास करती हैं। इनकी मधुर व्यवहार, कर्तव्यनिष्ठा का ही परिणाम है कि यह लगातार अस्पताल के नर्सिंग यूनियन के महासचिव पद पर तैनात हैं। इनके कार्यों को देखते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने 2019 में शोभना को फ्लोरेंस नाइटेंगल से नवाजा। वहीं इन्हें 2020 में का इंटनेशनल नोबल सिटीजन अवॉर्ड से नवाजा गया। अपने प्रयासों से शोभना ने सविंदा पर तैनात नर्सिंग स्टाफ के वेतन में वृद्धि कराया।

यह युवा जगा रहा आशा की किरण
जीएमसीएच-32 के नर्सिंग स्टाफ व अस्पताल के नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डबकेश कुमार ऊर्जा के भंडार हैं। राजस्थान के भरतपुर निवासी डबकेश 2013 से जीएमसीएच में 2013 से तैनात हैं। 2018 में उन्हें यूनियन का अध्यक्ष चुना गया। अपने 2 साल के छोटे से कार्यकाल में डबकेश में अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के प्रमोशन पोस्ट के 20 साल से लंबित प्रस्ताव को इंडियन नर्सिंग काउंसिल के अनुसार बनाया। इसके साथ ही नए पद सृजन से जुड़ी 12 साल से पेंडिंग फाइल को आगे बढ़ाया। मौजूदा समय में डबकेश कोरोना के मरीजों के वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं।
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