चंडीगढ़। चंडीगढ़ अपनी खूबसूरत हरियाली और सुव्यवस्थित सड़कों के लिए देशभर में पहचाना जाता है। यहां मौजूद 100 साल से अधिक पुराने धरोहर वृक्ष आज भी अपने लंबे सफर की यादों को संजोए खड़े हैं। इन विशाल पेड़ों के चौड़े तने, फैली हुई शाखाएं और घनी छांव लोगों को गर्मी में राहत देने के साथ मानसिक सुकून भी दे रही हैं। शहर में कई ऐसे पीपल, बरगद और अन्य प्रजातियों के पेड़ हैं जिन्हें प्रशासन ने हेरिटेज ट्री का दर्जा दिया हुआ है। इनमें कुछ वृक्ष 250 से 350 साल तक पुराने बताए जाते हैं। सेक्टर-38 के गुरुद्वारे का विशाल बरगद और खुड्डा अलीशेर गांव का पीपल वृक्ष शहर की ऐतिहासिक पहचान बन चुके हैं। सुखना लेक पर 150 साल से ज्यादा पुराना पीपल का पेड़ इसमें शामिल है। चंडीगढ़ शहर को 1952 में बसाया गया था।
वन विभाग के अनुसार चंडीगढ़ में दर्जनों ऐसे पेड़ हैं जिन्हें उनकी उम्र, ऐतिहासिक महत्व और पर्यावरणीय योगदान के आधार पर धरोहर श्रेणी में शामिल किया गया है। इन पेड़ों की नियमित निगरानी की जाती है ताकि उन्हें दीमक, फंगस और अन्य बीमारियों से बचाया जा सके। इन धरोहर वृक्षों के नीचे सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग टहलने, योग करने और समय बिताने पहुंचते हैं। शहरवासियों का कहना है कि आधुनिक भागदौड़ के बीच ये पुराने पेड़ प्रकृति से जुड़ने का अहसास कराते हैं। कई लोग इन्हें शहर की जीवित विरासत मानते हैं। चंडीगढ़ की कई सड़कें भी यहां लगे विशेष पेड़ों की वजह से पहचानी जाती रही हैं। कहीं इमली रोड, कहीं महोगनी रोड तो कहीं अर्जुन और अमलतास के पेड़ों से सजी सड़कें शहर की पहचान बनी हुई हैं।