सरकार ने शुरू किया ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, शराब की एक-एक बोतल का रहेगा हिसाब
क्यूआर कोड स्कैन करने से बोतल से शराब निर्माता, तारीख समेत मिलेगी पूरी जानकारी
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। सरकार शराब की तस्करी रोकने और राज्य में बेची जाने वाली एक-एक बोतल का हिसाब रखने के लिए राज्य में आज से ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम शुरू करने जा रही है। अब शराब की हर नई बोतल पर 12 दिसंबर से क्यूआर कोड लगना शुरू हो जाएगा। क्यूआर कोड की स्कैनिंग से शराब निर्माता की जानकारी, बाटलिंग की तारीख व एमआरपी का भी पता चल सकेगा। स्कैनिंग से यह भी पता चल सकेगा कि कौन सी शराब की पेटी या बोतल किस रिटेल स्टोर या दुकान पर गई है। इस कदम से शराब की तस्करी पर लगाम कसी जाएगी और सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। प्रदेश में शराब की बोतलों में अभी होलोग्राम चस्पा किया जा रहा है। अब सरकार ने इससे आगे जाकर क्यूआर कोड लगाने का निर्णय लिया है। सूत्रों ने बताया कि होलोग्राम लगने के बावजूद शराब की तस्करी नहीं रुक पा रही थी। इससे सरकार के राजस्व को भी चोट लग रही थी। इसलिए सरकार ने हर बोतल की गहन निगरानी के लिए पुख्ता प्लान तैयार किया। सरकार ने घोषणा तो काफी समय पहले कर दी थी। क्यूआर कोड के लिए टेंडर भी आमंत्रित किए गए मगर कोई प्राइवेट कंपनियां नहीं आई। उसके बाद सरकार ने एनआईसी से क्यूआर कोड बनवाया। अब इसे मंगलवार से लागू कर दिया जाएगा। हरियाणा आबकारी एवं कराधान आयुक्त अशोक कुमार मीणा ने बताया कि 12 दिसंबर से शराब की बोतलों की ट्रैकिंग का नया सिस्टम शुरू किया जा रहा है। अब हर बोतल पर क्यूआर कोड होगा। इससे एक-एक बोतल का हिसाब रहेगा और चोरी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। उन्होंने बताया कि क्यूआर कोड से यह भी पुख्ता हो जाएगा कि शराब की गुणवत्ता ठीक है। नई व्यवस्था के तहत बॉटलिंग प्लांट से निकलने वाली हर बोतल पर अब क्यूआर कोड होगा। इससे बाहर से आने वाली अवैध शराब की सप्लाई भी रुकेगी और वैध शराब बिकने से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
शराब की अवैध फैक्टरी की जांच करेंगे आबकारी इंस्पेक्टर
हरियाणा में जहरीली शराब कांड के बाद अवैध शराब के ठिकानों की जांच के लिए आबकारी इंस्पेक्टरों की ड्यूटी भी फिक्स कर दी गई है। मीणा ने बताया कि जोन के हर इंस्पेक्टर की ड्यूटी फिक्स कर दी गई है। हर इंस्पेक्टर अपने-अपने इलाके पर निगरानी रखेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने यमुनानगर और अंबाला में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पता चला था कि अपराधी किस्म के लोग अवैध शराब तैयार करते थे। उसके बाद सवाल भी खड़े हुए थे कि इन पर कौन निगरानी रखेगा। उसके बाद से आबकारी विभाग और पुलिस ने राज्य में अभियान चलाकर ऐसे लोगों पर शिकंजा कसा था।