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बॉन्ड पॉलिसी का विरोध: रोहतक PGI में आज से ऑपरेशन भी नहीं होंगे, आमरण अनशन की चेतावनी

Fri, 25 Nov 2022 02:13 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)

सार

छात्राओं का कहना है कि गोहाना में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार से बॉन्ड नीति को वापस लेने की मांग करेंगी। वहीं, नूंह के शहीद हसन खान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को ओपीडी तो चालू रही लेकिन यहां अप्रेंटिस कर रहे 100 छात्रों ने शुक्रवार को हड़ताल पर जाने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखित में सूचित कर दिया है।
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क्रमिक अनशन पर बैठे विद्यार्थी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ एमबीबीएस विद्यार्थियों के समर्थन में गुरुवार को रोहतक पीजीआई और करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर्स ने ओपीडी में ड्यूटी नहीं दी। पीजीआई में वार्ड व इलेक्टिव ओटी की सेवाएं भी बाधित रहीं। शिक्षक, गैर शिक्षक व नर्सिंग एसोसिएशन भी अपनी कॉमन कैडर पॉलिसी को लेकर एमबीबीएस विद्यार्थियों के समर्थन में आ गए। 

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स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय व पीजीआई के अधिकारियों से लंबी बैठक के बाद विवि की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने 25 नवंबर से ओपीडी में मरीज देखने व इलेक्टिव सर्जरी में ऑपरेशन नहीं करने का फैसला किया है। साथ ही 26 नवंबर से संस्थान में मरीज भर्ती नहीं किए जाएंगे। इस पर भी सरकार ने सुनवाई नहीं की तो 28 नवंबर से आपात सेवाएं भी पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। 

वहीं, एमबीबीएस विद्यार्थियों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। पहले दिन 24 घंटे के लिए 11 विद्यार्थी क्रमिक अनशन पर बैठे। 48 घंटे बाद आमरण अनशन की भी चेतावनी दी है। शाम को विद्यार्थियों की उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मुलाकात हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री व एसीएस से बात की जाएगी। वहीं पीजीआई प्रशासन ने इस पूरे मामले में कुछ भी कहने से परहेज कर रहा है। 

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गोहाना में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगीं छात्राएं
बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में धरने पर बैठी खानपुर कलां के बीपीएस महिला मेडिकल कॉलेज की छात्राओं के समर्थन में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने 48 घंटे तक पेन डाउन हड़ताल करने का फैसला लिया है। एमबीबीएस की छात्राएं शुक्रवार सुबह 10 से 12 बजे तक दो घंटे पेन डाउन हड़ताल करेंगी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को ओपीडी प्रभावित रह सकती है। 

छात्राओं का कहना है कि गोहाना में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार से बॉन्ड नीति को वापस लेने की मांग करेंगी। वहीं, नूंह के शहीद हसन खान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को ओपीडी तो चालू रही लेकिन यहां अप्रेंटिस कर रहे 100 छात्रों ने शुक्रवार को हड़ताल पर जाने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखित में सूचित कर दिया है।

इनका मिला साथ
पीजीआई की ज्वाइंट एक्शन कमेटी एमबीबीएस विद्यार्थियों के समर्थन उतर आई है। इसमें एचएसएमटीए (हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन), यूएचएस गैर शिक्षक कर्मचारी संघ व नर्सिंग एसोसिएशन शामिल है। इन तीनों संगठनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के करीब 50 से ज्यादा सदस्यों ने गुरुवार दोपहर बाद विवि प्रशासन के साथ बैठक की। यहां लंबी बहस के बाद कमेटी ने अपनी कॉमन कैडर पॉलिसी का विरोध करते हुए विद्यार्थियों को अपना समर्थन दिया। 
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कमेटी के चेयरमैन डॉ. आरबी जैन ने कहा कि सरकार कर्मचारियों को कॉमन कैडर पॉलिसी लागू करने जा रही है। इसका शुरू से ही विरोध किया जा रहा है। इसके तहत सरकार पीजीआई के स्टाफ को प्रदेश में कहीं भी स्थानांतरित कर सकती है। इससे पीजीआई का शोध कार्य भी प्रभावित होगा। बॉन्ड पॉलिसी भी विद्यार्थी या जनहित में नहीं है। इसलिए यह कदम उठाया गया है। 

इससे पूर्व, पीजीआई के विद्यार्थी व आरडीए सदस्य गुरुवार सुबह ओपीडी के बाहर पहुंचे। यहां गार्डों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद सभी वहीं बैठ गए और नारेबाजी के जरिये बॉन्ड पॉलिसी पर विरोध जताया। यहीं विद्यार्थियों ने अपना एक्शन प्लान तैयार किया। इसमें भूख हड़ताल करने, भाजपा विधायकों के घरों का घेराव, एचएमटीए (हरियाणा मेडिकल टीचिंग एसोसिएशन) का समर्थन लेने के लिए आम सभा की बैठक, एमडीयू में शुक्रवार से कक्षाओं के निलंबन के बारे में छात्र संगठनों से सहयोग लेने, नर्सिंग एसोसिएशन से हड़ताल का समर्थन लेने के लिए बातचीत करना शामिल रहा। इस एक्शन प्लान को धरनारत विद्यार्थियों ने गुरुवार को 11 विद्यार्थियों की क्रमिक अनशन के साथ लागू करना शुरू कर दिया।

निदेशक ने जारी किया नोटिस
अभिभावकों को चिट्ठियां भेजे जाने के बाद अब गुरुवार को पीजीआई निदेशक की ओर से नोटिस जारी किया गया है। इसमें धरने पर बैठे सभी विद्यार्थियों को जल्द धरने से उठने की नसीहत दी गई है। ऐसा नहीं होने पर उन्हें हॉस्टल से निकाल दिया जाएगा। यही नहीं चार नवंबर की रात सभागार के बाहर इकट्ठा होने पर दर्ज की गई एफआईआर भी खारिज नहीं किए जाने की चेतावनी दी गई है। विद्यार्थियों ने इसकी निंदा की है। 
 
एमबीबीएस की छात्राओं की हड़ताल का ओपीडी पर कोई प्रभाव नहीं होगा। यदि जूनियर रेजिडेंट (जेआर) के विद्यार्थी एमबीबीएस की छात्राओं के समर्थन में हड़ताल करते हैं तो वरिष्ठ चिकित्सक ओपीडी की कमान संभालेंगे। ओपीडी सुचारु रूप से चालू रहेगी। -डॉ. राजीव महेंद्रु, निदेशक, महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां।
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