चंडीगढ़। सेक्टर 17 के टीएस सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी में शनिवार को त्रिभाषीय कवि दरबार और मुशायरा का आयोजन हुआ। यह आयोजन आधारशिला साहित्यिक संस्था की ओर से हुआ। संस्था की अध्यक्ष एवं संस्थापक अनिता सुरभि ने बताया इस मुशायरे व कवि सम्मेलन में जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शायर डॉ. नफस अंबालवी की अध्यक्षता में हुई।
दिल्ली से आए गीतकार एवं गजलकार प्रवीण कुमार आजाद, शायर सरफ नानपारवी, अंबाला से आए शायर नफस अंबालवी, शायर शम्स तबरेजी, कवि डॉ. राजेंद्र नौजिया और यमुनानगर से आए प्रसिद्ध कवि अशोक अग्रवाल नूर, चरणजीत चंदवाल, चंडीगढ़ से कवयित्री अनिता सुरभि, ममता कालरा और युवा शायर मंयक नारी प्रमुख हैं।
मंच संचालन शीनू वालिया ने किया। प्रवीण कुमार आजाद ने उसके मिसरे मुझसे मिलते-जुलते हैं, मैं क्यूं बदलू अपने मिसरे,बदले वो पेश किया। नफस अंबालवी ने हरेक लब पर मेरी महकशी की चर्चा है, मगर कहीं भी मेरी तशनगी का जिक्र नहीं पेश किया। मयंक नारी ने भूख से सिकुड़ा हुआ है पेट उसका और वो खाना डिलीवर कर रहा है पेश किया।
अशोक नूर ने हम लेते रहते हैं रोटी के सपने, और वे दस्तरखान बदलते रहते हैं पेश कर तालियां बटोरी। चरणजीत चंदवाल ने गलत फहमी तुम्हारी की नहीं कोई भी हद यारो, किसी का देश से ऊंचा समझ बैठे हो कद यारो पेश किया।
अनीता सुरभि ने मैने जेहन में टपकती कविता की बूंदों से कहा, कुछ देर तुम भी सुस्ता लो तो, मैं अपनी अधूरी कहानी पूरी कर लूं पेश किया। शीनू वालिया धरा ने तुम्हें मिलने की चाहत ने हमें मजबूर कर डाला, कभी ख्वाबों में मिलते हैं कभी नींदों में चलते हैं पेश किया।