जिला इकाइयों की घोषणा पर ही जजपा ने केवल तीन जगह सिंबल पर अपने उम्मीदवार उतारे। इसी साल निकाय चुनाव से पहले भाजपा ने अलग मैदान में उतरने का निर्णय लिया था, जिसे हाईकमान के दबाव में बाद में बदलना पड़ा। निकाय चुनाव दोनों दलों ने गठबंधन के तहत ही लड़ा था। भाजपा ने जजपा के लिए नगर परिषद और नगरपालिकाओं की सीटें छोड़ दी थीं।
अब तीन नगर निगमों पर निगाहें
पंचायत चुनाव निपटने के बाद अब दोनों दलों की निगाहें गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर नगर निगम के चुनाव पर टिक जाएंगी। दोनों ही दल इन निगमों पर अपना कब्जा जमाना चाहेंगे। मानेसर नगर निगम में पहली बार ही चुनाव होना है। राजनीतिक तौर पर यह तीनों निगम बेहद अहम हैं। अभी यहां से सांसद व अधिकतर विधायक भाजपा के ही हैं। इस चुनाव में भाजपा-जजपा साथ मैदान में उतरेंगे या नहीं, इसका फैसला आने वाले दिनों में हो जाएगा। चूंकि, 2024 के चुनाव से पहले शहरी क्षेत्र में यह बड़ा चुनाव होना है।
जजपा के साथ आगे बढ़ने के हक में नहीं भाजपा संगठन
भाजपा का संगठन जजपा के साथ मिलकर 2024 का विधानसभा चुनाव लड़ने के हक में नहीं है। निकाय और पंचायत चुनाव से पहले संगठन की बैठकों में वरिष्ठ नेता और अनेक विधायक अलग चुनाव लड़ने का मशविरा दे चुके हैं। कुछ का तो यह भी कहना है कि जजपा के मंञियों वाले विभागों में कथित घोटालों के आरोप लगने से सरकार की छवि पर असर पड़ा है। यह बात भाजपा आलाकमान के पास भी पहुंची है। बावजूद इसके भाजपा-जजपा का गठबंधन प्रदेश में बरकरार है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।
राहें जुदा करने को लेकर जल्दबाजी नहीं
भाजपा-जजपा में गठबंधन से जुदा होने को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कदम से कदम मिलाकर सरकार चला रहे हैं। संगठन के तौर पर दोनों दलों ने अगले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज की हुई हैं। जजपा नौ दिसंबर को भिवानी में होने वाले अपने चौथे स्थापना दिवस को लेकर फील्ड में डटी है। इस रैली से जजपा की भविष्य की राजनीति के संकेत मिलेंगे।