प्रमुख न्यायाधीशों, शिक्षाविदों और अधिवक्ताओं ने सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली विधिक व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।
चंडीगढ़ के लॉ भवन में आयोजित गोष्ठी में न्यायमूर्ति मीनाक्षी मेहता ने सिरसा में पहली महिला न्यायिक अधिकारी के रूप में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने युवाओं को पारंपरिक सीमाओं से आगे जाकर नई विधिक भूमिकाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया। न्यायमूर्ति विनोद एस भारद्वाज ने कहा कि हमें एक ऐसी प्रणाली चाहिए जो महिलाओं को अपवाद नहीं, अवसर के रूप में देखे। यह बदलाव सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पुरुषों को भी इसमें समान भागीदारी निभानी होगी।
हमें एक अच्छा वकील कहना सीखना होगा न्यायमूर्ति- पंकज जैन
न्यायमूर्ति पंकज जैन ने कहा कि हमें महिला वकील य महिला जज जैसे लेबल हटाकर सिर्फ अच्छा वकील कहना सीखना होगा। योग्यता का कोई विशेषण नहीं होता। डॉक्टर श्रुति बेदी ने कहा कि जब तक विधि शिक्षा संस्थानों में लैंगिक तटस्थ मंच नहीं बनते, तब तक कोर्ट रूम में बराबरी की बात अधूरी रहेगी।