फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़िए, मजबूरी और इंसानियत की ‘दास्तां-ए-चोर’

Mon, 20 Oct 2014 01:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब कला भवन में रविवार को ‘दास्तां-ए-चोर’ नाटक का मंचन किया गया। नाटक में दिखाया गया कि युवा किस प्रकार हालात से तंग आकर चोरी का रास्ता अपनाते हैं लेकिन उनमें इंसानियत कायम रहती है।
विज्ञापन


नाटक में दिखाया गया कि एक बुजुर्ग दंपति जिन बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा करते हैं, वे उन्हें विदेश जाकर भूल जाते हैं। इस दपंति के घर एक दिन दो चोर घुस आते हैं। संयोग से दोनों ही चोर एक-दूसरे को नहीं जानते। जब मुलाकात होती है तो वे अपनी-अपनी जिंदगी की कहानी बताते हैं।

एक चोर कहता है कि वे अपनी पत्नी की मांगों को पूरा नहीं कर पाता, जिस कारण उसने यह रास्ता अपनाया। वहीं दूसरा चोर अपने घर की आर्थिक मजबूरियां बताता है। इसी बीच वृद्ध को हार्ट अटैक आ जाता है। एक चोर उसकी जान बचाने की बात कहता है, लेकिन दूसरा उसे मौके का फायदा उठाने को कहता है।
विज्ञापन


अंत में दोनों बुजुर्ग की जान बचाने की कोशिश करते हैं। चोरी का इरादा छोड़ वे डॉक्टर को ले आते हैं। बुजुर्ग महिला उन चोरों का शुक्रिया अदा करती है और कहती है कि तुमने चोरी के बजाय मेरे पति की जिंदगी बचाई। वे उन चोरों को ही अपना बेटा मान लेती है।

नाटक में बुजुर्ग दंपति का किरदार गौरव आर्या और कंचन ने किया। चोरों के किरदार में धर्मेंद्र और सुनील राणा थे। नाटक की कहानी जगदीश शर्मा ने लिखी जबकि निर्देशन रंजीत रॉय ने किया।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें