ग्रवित योजना के तहत बनने वाले वालंटियर्स को गांव का स्थायी निवासी होने के साथ-साथ 18 से 35 उम्र का होना, कम से कम बारहवीं पास और उसे कंप्यूटर का भी होना जरूरी है। ये युवा कम से कम एक साल या तीन साल अवधि तक अपना मिशन लेकर चलेंगे।
गांव में 3 वर्ष के संतोषजनक कार्य के बाद युवाओं को सरकार प्रमाणपत्र भी देगी। इन वालंटियर्स के कार्य का मूल्यांकन पहले तो खुद स्वयंसेवक आत्म मूल्यांकन के रूप करेंगे। इसके साथ-साथ उनकी मासिक रिपोर्ट के आधार पर उन्हें खंड, जिला व राज्य स्तरीय पर सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक के रूप में पुरस्कृत भी किया जाएगा।
कुछ इस तरह काम करेंगे युवा
युवाओं की यह टीम अपने गांवों में कमजोर वर्ग के उत्थान में, स्त्री वर्ग के न्याय व सम्मान के लिए कार्य करना, गांवों की धरोहर व विरासत का सम्मान व सुरक्षा, लोगों में आपसी सहयोग, अपनी सुरक्षा और अपने आत्मबल को बढ़ावा देना, गांव में शांति और भाईचारे को बढ़ाना, ग्रामीणों को बैंकिंग व सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, फूलों की खेती को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, मृदा क्षरण को रोकना, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन, कृषि व दैनिक जीवन में पर्यावरण सुरक्षा, ग्रामीणों को कर, बिजली-पानी बिल भरने को प्रेरित करना, विकास कार्यों में सामूहिक भूमिका बनना, ग्रामीणों को उनके अधिकारों व कर्त्तव्यों की जानकारी देना, गांव के पिछड़े व उपेक्षित वर्ग को आगे बढ़ाना इत्यादि अभियानों को चलाएगी।