चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय का खजाना यूं ही खाली नहीं हो रहा, इसके पीछे भी उन्हीं के लोग जिम्मेदार हैं। इसका एक उदाहरण है कि जनरल स्टोर के आवंटित लाइसेंस पर खाद्य पदार्थ धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। यदि एस्टेट विभाग इसका पालन सही से करवाए तो पीयू के खजाने में राजस्व अधिक पहुंचेगा, लेकिन इसका ध्यान नहीं रख जा रहा। जानकारों का कहना है कि इसके नाम पर कमीशन का बड़ा खेल हो रहा है। अब कुछ कर्मचारियों ने इसका विरोध किया है और वीडियो जारी कर अधिकारियों को भेजी है।
पंजाब यूनिवर्सिटी के सेक्टर- 14 स्थित बाजार में सैकड़ों दुकानें हैं। इन दुकानों में बेचे जाने वाले सामान के लिए विश्वविद्यालय की ओर से लाइसेंस जारी किए जाते हैं और उसी के हिसाब से दुकानों का किराया व राजस्व तय होता है। कर्मचारियों ने इस खेल का खुलासा करते हुए आरोप लगाया है कि एसबीआई बैंक के नीचे संचालित दुकानों पर खाद्य पदार्थ बनाकर लोगों को मुहैया कराया जा रहा है। इस खाद्य पदार्थ को खाकर यदि किसी की तबीयत खराब होती है तो इसके जिम्मेदार कौन होंगे, इसका किसी के पास जवाब नहीं है। लाइसेंस आवंटित करके उसकी जांच करने का काम पीयू के एस्टेट विभाग के पास है, लेकिन वह कागजों में सबकुछ ओके दिखा रहा है जबकि हकीकत कुछ और ही है। इस प्रक्रिया से पीयू को हर माह लाखों रुपये का चूना लग रहा है और उन्हीं के लोग यह चूना लगाने में कामयाब हो रहे हैं।
एक दुकान संचालक कहते हैं कि वह सात साल से यह काम कर रहे हैं किसी को कोई शिकायत नहीं है। लाइसेंस के मुताबिक ही काम हो रहा है। एस्टेट ऑफिस के सीनियर कर्मचारी सुरजीत कहते हैं कि वह समय समय पर जांच करते हैं और अधिक जानकारी वह किसी को नहीं दे पाएंगे। डीआर ओमेश का कहना है कि इसकी जानकारी देने का अधिकार उनके पास नहीं है। रजिस्ट्रार से बात करें। जानकारों का कहना है कि एस्टेट विभाग यदि अपनी जिम्मेदारी सही से निभाएं तो पीयू के खजाने में लाखों-करोड़ों रुपये हर माह इन दुकानों के संचालन से आ सकता है।