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पीयू के शिक्षकों व कर्मचारियों को भी नहीं मिलेगा महंगाई भत्ता

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों को भी एक साल तक महंगाई भत्ता यानी डीए नहीं मिलेगा। इस पर केंद्र सरकार ने रोक लगाई है। केंद्र के ही वेतन नियमों को पीयू फॉलो करता है।
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इस तरह पीयू डीए के रूप में मिलने वाला सालाना 22 करोड़ रुपये इस बार नहीं मिलेगा। शिक्षकों व कर्मचारियों को झटका जरूर लगा लेकिन देशहित में यह जरूरी है। वह भी इसका समर्थन कर रहे हैं। पंजाब विश्वविद्यालय को कई वर्षों से वेतन की ग्रांट केंद्र सरकार देती आ रही है। वहीं से वेतन आदि के जो आदेश जारी होते हैं वह पीयू में लागू होते हैं।
शिक्षकों का वेतनमान भी वहीं से निर्धारित है। कौन से भत्ते मिलेंगे और कौन से नहीं, यह भी वहीं से तय है। पीयू के वेतन बजट में केंद्र सरकार छह फीसदी की बढ़ोत्तरी करती है। लगभग 250 करोड़ रुपये पीयू को वेतन के लिए केंद्र सरकार देती है।
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पीयू में 700 से अधिक स्थायी शिक्षक दे रहे सेवाएं
पीयू में तीन हजार से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। इसके अलावा स्थायी शिक्षकों की संख्या 700 से अधिक हैं। इन सभी के वेतन की जिम्मेदारी केंद्र के पास है। बाकी गेस्ट फैकल्टी या मानदेय पर रखे गए कर्मचारियों को पीयू अपनी जेब से देता है। पीयू के शिक्षकों को अभी सातवें वेतनमान का लाभ भी नहीं मिला है। यह मामला कई बार उठाया जा चुका है।
हर साल वेतन का 10 फीसदी मिलता है डीए
कोरोना वायरस के कारण देश में बढ़ रहे आर्थिक संकट की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने सभी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर एक साल तक रोक लगा दी है। इसके अंतर्गत पंजाब विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी व अधिकारी भी आते हैं। पीयू हर साल शिक्षक व कर्मचारियों को वेतन का दस फीसदी महंगाई भत्ता देता है। इस तरह तीन हजार से लेकर 15 हजार रुपये तक महंगाई भत्ता लोगों को मिलता है। वीरवार की शाम लोगों को यह बात पता चली तो वह शुक्रवार को वेतन का गणित लगाते नजर आए। सूत्रों का कहना है कि कुछ अन्य कटौतियां भी की जा सकती हैं लेकिन केंद्र ने अभी उस पर निर्णय नहीं लिया है।
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