500 और एक हजार रुपये के नोट बंद का होने का असर संडे कार बाजार पर बुरी तरह से पड़ा है। पिछले संडे को मुश्किल से सिर्फ दो कारे ही बिकी है, वहीं आज फिर से कार बाजार लगने जा रहा है।
नोटबंदी से पहले बाजार में जहां हर रविवार को 150 से 200 कारें बिक जाया करती थी वहीं सरकार के फैसले के बाद पिछले संडे को दो कारें भी बड़ी मुश्किल से बिकीं है। जिक्रयोग है कि संडे कार बाजार में 80 प्रतिशत कारोबार नगद लेनदेन से होता है।
विमुद्रीकरण के कारण लोगों के पास कैश की कमी हो गई है। इससे गाड़ियों की खरीद-फरोख्त पर बुरा असर पड़ा है। वहीं कार डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलशन कुमार का कहना है कि सेक्टर-7 मध्य मार्ग पर बाजार लगाने के लिए प्रति कार डीलर को 17 से 20 हजार रुपये का खर्चा पड़ता है। डीलर्स ने नगर निगम को एडवांस राशि दी हुई है, इसलिए कार बाजार लगाना मजबूरी है।
हल्लोमाजरा के लिए आई सिर्फ तीन बिड
नगर निगम ने कार बाजार को हल्लोमाजरा में शिफ्ट करने की योजना बनाई है, लेकिन इसकी नीलामी के लिए सिर्फ तीन डीलर्स ने ही बिड दी है। डीलर्स यहां पर बाजार शिफ्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि हाईकोर्ट के आदेश पर निगम ने हल्लोमाजरा में 500 कारें पार्क करने के लिए जगह तैयार की है।