रक्षाबंधन पर हरियाणा रोडवेज की बसों में सरकार की तरफ से दिए जाने वाला
तोहफा बहनों को मिला। फ्री यात्रा में बहनों की संख्या आम दिनों में सफर
करने से कई गुना अधिक रही।
हर स्टॉपेज पर बस रुकी और बहनों को लेकर चली।
बहनों को सफर के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न आए, इसके लिए कर्मचारियों
को सख्त हिदायतें दी गई। महाप्रबंधक रविंद्र पाठक, वर्कशॉप मैनेजर सुरेश
मलिक, डीआई मोहनचंद सहित अन्य अधिकारी बसों पर निगरानी के लिए बसस्टैंड पर
डेरा डाले रहे।
हरियाणा रोडवेज के करनाल डिपो से रक्षाबंधन पर रोजाना
से अधिक बसें दौड़ीं। 183 बसें लोकल मार्गों पर रहीं। लांग रूट पर जाने
वाली बसें भी लोकल मार्गों पर चलाई गईं। सवारियां इतनी थी कि सभी बसें भरकर
चलीं। सीट पूरी होने के बाद सवारियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा।
कंडक्टरों को भी महिलाओं के बीच से गुजरने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
शनिवार देर शाम तक भी रोडवेज बस चलती रही। सवारियां बहुत थीं। अधिकारियों
का कहना है कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार से एक दिन पहले और एक दिन तक
सवारियों की भीड़ रहती है। रोडवेज बसों में फ्री यात्रा के चलते सवारियां
बढ़ने पर निजी वाहन भी बहुत सामने आए। खासकर पुरुष सवारियों को निजी वाहनों
में सफर करना बेहतर समझा।
जब पढ़ते थे अब नौकरी के साथ मिले
हरियाणा
रोडवेज के चालक मनोज कुमार सुबह असंध से चले। जींद चौक से महिला सवारियां
चढ़ीं। उन्हीं बहनों में से एक बहन ड्राइवर के स्कूल समय सहपाठी मिल गई।
ड्राइवर ने पहचान लिया और आगे बुलानेे पर उसने भी चालक को पहचान लिया। फिर
क्या था, वहीं पुराने किस्से सामने आए। पूरे एक घंटे के सफर में उनकी बातें
पूरी नहीं हुईं। बस से उतरते वक्त चालक ने रक्षाबंधन पर अपने भाई होने का
भी फर्ज अदा किया। इसी तरह अनेक कर्मचारियों ने बसों में भाई बहन का रिश्ता
निभाया।
बच्चों के साथ सफर करने में आई दिक्कत
फ्री यात्रा के
दौरान महिला सवारियां बहुत थीं। इस कारण छोटे बच्चों को साथ लेकर चलने
वाली महिला सवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर के वक्त धूप में
तपते हुए वह अपने गंतव्य के लिए बस को ढूंढते रहे। बस में कई महिलाओं की
सीट को लेकर भी बहस होती रही। भीड़ के कारण बच्चे बिलखते रहे।