प्रदर्शनी में बंगलुरू सिल्क के साथ ही बनारसी सिल्क, मैसूर सिल्क, गडवाल सिल्क-कॉटन, नाइन यार्ड, ऑर्गेंजा सिल्क, पटोला और पैथनी साड़ियां ढेरों रेंज में उतारी गई हैं। कर्नाटक के कारीगर अहमद ने बताया कि बंगलुरू सिल्क अपनी सादगी, शुद्धता और रेशम की बनावट के लिए जाना जाता है। वहीं, बनारस के कारीगर शब्बीर अहमद का कहना है कि असली बनारसी सिल्क को देर तक उंगलियों से छूकर देखेंगे तो गर्माहट महसूस होगी। उन्होंने बताया कि इस समय युवतियों को बनारसी सिल्क काफी पसंद आ रहा है, क्योंकि पिछले शादी के मौसम की खरीददारी चल रही है। वहीं, कश्मीर के कारीगरों ने अपने स्टॉल पर कश्मीरी हैंडलूम, सूट, शॉल, स्टॉल, शत प्रतिशत वूल, याक वूल, पशमीना शॉल की आकर्षक रेंज प्रदर्शित की हैं। यह प्रदर्शनी चार फरवरी तक सुबह 11 बजे से रात आठ बजे तक चलेगी। इस प्रदर्शनी में प्रवेश निशुल्क है।