चंडीगढ़। गौरी शंकर सेवादल गौशाला, सेक्टर-45 की ओर से सेक्टर-17 के सर्कस ग्राउंड में राधे-राधे, राधे गोविंद नाम कीर्तन के साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को कथा के छठे दिन पुंडरीक गोस्वामी ने प्रवचन करते हुए कहा कि कथा के असली यजमान वे भक्त होते हैं, जो कथा को श्रद्धा से सुनते हैं और उसे अपने जीवन में स्वीकार करने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने बताया कि संकीर्तन दो प्रकार का होता है। एक वह, जहां रस बरसाया जाता है और दूसरा वह, जहां रस भीतर से फूटता है। जब कथा-संकीर्तन के दौरान भक्तों के चरण स्वयं नृत्य के लिए थिरकने लगते हैं, तब समझना चाहिए कि रस भीतर से प्रकट हो रहा है, जैसे धरती के भीतर से पानी अपने आप रिसने लगता है।
उन्होंने कहा कि जीव अभी इतना परिपक्व नहीं हुआ है कि वह भगवान के प्रेमरस का पूर्ण स्वाद ले सके। लेकिन ठाकुर जी अपनी करुणा से श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से भक्तों को अपनी दिव्य लीलाओं के रस का अनुभव करवाते हैं। विशेषकर वे भक्त, जो परमात्मा को जानने और समझने के लिए उत्सुक होते हैं, उन्हें इस कथा के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद प्राप्त होता है।