चंडीगढ़। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को वापस लेने पर अड़े किसानों के आंदोलन से डाक विभाग प्रभावित हो रहा है। दिल्ली के बार्डर पर 15 दिनों से धरने पर बैठे किसानों की वजह से गाड़ियों का आना-जाना बंद है। सेक्टर-17 स्थित प्रधान डाकघर के बरामदे में डाक की सैकड़ों थैलियां पड़ी हैं।
कोरोना के चलते रेल का चलना बंद होने पर डाक विभाग ने रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (आरटीएन) से तैयारी शुरू की थी। रेल सेवा बंद होने से लुधियाना और जालंधर की डाक भी चंडीगढ़ आनी शुरू हो गई। इससे यहां काम और बढ़ गया। अब किसानों के आंदोलन के कारण दिल्ली आना-जाना बंद हुआ तो डाक के थैलों की भरमार हो गई। पंजाब और शिमला की गाड़ियां तो जा रही हैं, लेकिन दिल्ली की डाक फंसी पड़ी है। हालत यह है कि डाक विभाग के कर्मचारियों को खुद ही निगरानी करनी पड़ रही है ताकि डाक के बैग गुम न हो जाएं। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, लेकिन फिर भी निगरानी करनी पड़ रही है। इससे कर्मचारियों को अधिक देर तक ड्यूटी देनी पड़ रही है।
कुछ डाक की गाड़ियां प्राइवेट हायर की गई हैं, लेकिन किसानों के दिल्ली में धरने की वजह से निजी वाहन मालिक भी जाने से कतरा रहे हैं। उनका मानना है कि कहीं गाड़ी का नुकसान न हो जाए। बार्डर के बंद होने से वाहन के मालिक और चालक खतरा मोल नहीं लेना चाह रहे हैं।
इन शहरों के लिए हो रही है दिक्कत
दिल्ली, गाजियाबाद, पटना, लखनऊ, गुवाहाटी, इंफाल, जयपुर, अहमदाबाद सहित अन्य शहरों में जाने वाली डाक में साधारण डाक के अलावा स्पीडपोस्ट, रजिस्टर्ड डाक और पार्सल के बड़े-बड़े बैग रुके पड़े हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
दो दिनों में स्थिति ठीक हो जाएगी। कालका मेल शुरू हो गई है। अब दिल्ली डाक जल्द पहुंच जाएगी। इसके साथ ही दिल्ली से बाहर के प्रांतों में जाना शुरू होगा। दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन के कारण सड़क बंद होने के चलते यह स्थिति आई है। विभाग के कर्मचारी डाक को भेजने के लिए दिन रात लगे हुए हैं। -मनोज कुमार, सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिसेज चंडीगढ़ डिवीजन