चंडीगढ़। सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में महक दिया तंदा अकादमी की ओर से सामाजिक सरोकारों पर आधारित नाटक मिट्टी दा पूत का मंचन किया गया। नाटक में उन महिलाओं के जीवन संघर्ष और मानसिक पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। जिन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं होता और जिनकी कोख सूनी रह जाती है।
नाटक में दिखाया गया कि एक महिला, जिसे संतान सुख की प्राप्ति नहीं होती और जिसकी कोख सूनी रह जाती है, वह अपनी पीड़ा को शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं से व्यक्त करती है। वह मिट्टी का एक पूतला बनाती है और भगवान से यह अपील करती है कि उसे संतान का सुख नहीं मिला, लेकिन इस मिट्टी के पूत में जान भर दी जाए। यह दृश्य नाटक का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला और भावनात्मक हिस्सा रहा।
इस नाटक ने यह संदेश दिया कि समाज में आज भी निसंतान महिलाओं को कई बार ताने, अनदेखी और गलत सोच का सामना करना पड़ता है। कलाकारों ने यह संदेश दिया कि किसी भी महिला की कीमत सिर्फ मां बनने से नहीं होती, बल्कि उसके स्वभाव, व्यक्तित्व और सम्मान से तय होती है। इस नाटक में करीब 85 महिलाओं ने भाग लिया, जबकि कुल मिलाकर 130 कलाकारों ने मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस नाटक को समाज में संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच जगाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति के रूप में देखा गया।