चंडीगढ़। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत यूटी शिक्षा विभाग की ओर से किए गए चाइल्ड मैपिंग सर्वे में 2017 की तुलना में कभी स्कूल नहीं जा पाने वाले बच्चों की संख्या में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। सर्वेक्षण के अनुसार 2017 में 805 बच्चे ऐसे थे, जो कभी स्कूल नहीं गए, वहीं 2020 में इनकी संख्या बढ़कर 3282 हो गई। यूटी शिक्षा विभाग और प्रशासन दावा करता है कि वह घर-घर जाकर बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवाते हैं, जिससे कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रह जाए। वहीं पिछले वर्षों से लेकर 2020 तक के सर्वेक्षण में ट्रांसजेंडर बच्चों को शामिल ही नहीं किया गया है। सर्वेक्षण में 5 वर्ष से 18 वर्ष के बच्चों में महिला और पुरुष दो ही कैटेगरी है।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी किए गए सर्वेक्षण के अनुसार 2019 की तुलना में कभी स्कूल नहीं जा सकने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है। 2019 में ऐसे बच्चों की संख्या 3336 थी जो अब कम होकर 3282 हो गई। सर्वेक्षण के अनुसार 5 से 18 वर्ष की आयु के बीच पहचाने गए 166589 बच्चों में से 3160 स्कूल छोड़ने वाले थे और 3282 ने कभी स्कूल में दाखिला ही नहीं लिया था। 2019 में स्कूल छोड़ने वाले और कभी नामांकन नहीं करने वाले बच्चों की संख्या क्रमश: 3810 और 3336 थी। 2020 के सर्वेक्षण में सबसे अधिक स्कूल छोड़ने वाले बच्चों में 14 से 18 आयु वर्ग में 2269 बच्चे हैं। 11-14 वर्ग में 432 स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान की गई, जबकि 5 से 11 आयु वर्ग में 459 बच्चों ने स्कूल बीच में छोड़ा। जिन बच्चों ने कभी स्कूल में दाखिला नहीं लिया, उनमें 2722 की उम्र 5 से 11 के बीच, 258 की उम्र 11 से 14 के बीच और 302 की उम्र 14 से 18 के बीच है।
2019-2020 महामारी के समय में 6393 बच्चों ने किया पलायन
कोरोना महामारी के कारण 2019 से 2020 के समय अंतराल की बात करें तो बहुत से प्रवासी परिवारों ने शहर छोड़ा है। इसका असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा है। सर्वेक्षण के अनुसार 5 से 18 वर्ष की उम्र वर्ग में 2019 में कुल 172982 बच्चों की पहचान की गई थी। यही संख्या 2020 के सर्वेक्षण में 6393 घटकर 166589 हो गई है।
लड़कियाों की तुलना में लड़कों ने ज्यादा स्कूल छोड़ा
सर्वेक्षण-2020 के अनुसार स्कूल छोड़ने वाले और कभी स्कूल नहीं जा सकने वाले लड़कों की तुलना में लड़कियां आगे हैं। 1434 लड़कियों के स्कूल छोड़ने की तुलना में 1726 लड़के ने इस समय में स्कूल छोड़ा। कभी स्कूल में दाखिला नहीं लेने वालों में लड़कियों की संख्या 1584 जबकि 1698 लड़के है।
सेक्टर के मुकाबले गांवों के बच्चे कम जा रहे स्कूल
शिक्षा विभाग की ओर से क्लस्टर के अनुसार सर्वेक्षण किया जाता है। इसमें शहर के स्कूलों को 20 समूहों में बांटा गया है। सर्वेक्षण के अनुसार जो स्कूल शहर के गांवों में आते हैं, उन क्षेत्रों और कॉलोनी व झुग्गियों में रहने वाले बच्चों की संख्या स्कूल छोड़ने और कभी दाखिला नहीं लेने वाले दोनों कैटेगरी में अधिक है। सेक्टरों में ऐसे बच्चे बहुत ही कम पाए गए हैं।
चाइल्ड केअर इंस्टीट्यूट में रह रहे हैं 158 बच्चे
समाज कल्याण विभाग की सचिव निकिता पंवार ने बताया कि जो बच्चे वित्तीय समस्याओं के कारण शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते, उनके लिए हमने खासतौर पर चाइल्ड केअर इंस्टीट्यूट बनाए हैं। अभी यहां 158 बच्चे रह रहे हैं। इसमें बच्चे को 18 वर्ष की उम्र तक मुफ्त शिक्षा मुहैया करवा रहे हैं। वहीं कोरोना काल में प्रभावित परिवारों के बच्चे को हर माह दो हजार रुपए कोविड रिलीफ फन्ड दिया जा रहा है। पिछले हफ्ते तक विभाग 200 से अधिक बच्चों को यह फंड मुहैया करवा रहा था। हर माह इसकी संख्या जरूरत के अनुसार कम ज्यादा हो जाती है।