मोहाली। नगर निगम की सीमा बढ़ाने के बाद वार्डों की संख्या 70 से अधिक होने के दावों पर विराम लगता नजर आ रहा है। जानकारों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में नगर निगम क्षेत्र का विस्तार होने के बावजूद वार्डों की संख्या 50 ही रहने की संभावना है। बदलाव हुआ भी तो यह संख्या तीन वार्ड से अधिक नहीं होगी। हर वार्ड में मतदाताओं की संख्या लगभग दोगुनी हो जाएगी। नीति निर्धारकों के अनुसार पहले वार्ड बहुत छोटे मतदाताओं के आधार पर बनाए थे।
इस कारण कई पार्षद मात्र 700–800 या अधिकतम एक हजार वोट लेकर भी चुनाव जीत जाते थे। मौजूदा डिलिमीटेशन का लक्ष्य जनसंख्या और क्षेत्रफल के अनुपात में वार्डों का संतुलन स्थापित करना है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचा भी एक बड़ी चुनौती है। सेक्टर 68 स्थित मौजूदा नगर निगम भवन में 70 या उससे अधिक पार्षदों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। अधिकारियों के अनुसार नया भवन बनाने की फिलहाल कोई योजना भी नहीं है। वार्ड बंदी के अंतिम चरण में पहुंचते ही सभी प्रमुख राजनीतिक दल आप, भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल अपनी सक्रियता बढ़ा चुके हैं। चुनाव पार्टी सिंबल पर होने हैं, इसलिए हर वार्ड में चार बड़े उम्मीदवारों के आमने-सामने होने की संभावना है, जबकि कुछ निर्दली को भी राजनीतिक समर्थन मिलने की उम्मीद है।
इस बीच बूथ लेवल ऑफिसर जनसंख्या सर्वे, घर-घर सत्यापन और मतदाता सूची संशोधन कार्य को 31 दिसंबर की डेडलाइन से पहले पूरा करने में जुटे हैं। इसके बाद वार्ड सीमाओं में कोई बदलाव संभव नहीं होगा। उधर, नए शामिल गांवों के कुछ किसानों ने नगर निगम में शामिल होने की प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी है। इसकी सुनवाई इस सप्ताह होने की संभावना है। विपक्षी दलों ने जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव में भी पक्षपात के आरोप दोहराए हैं।