चंडीगढ़। शारदीय नवरात्र के स्वागत के लिए शहर के मंदिर सज गए हैं। रविवार 11 अक्तूबर से मां दुर्गा की आराधना का पर्व शुरू होगा। इस बार नवरात्र 10 दिनों के होंगे। सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर के भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार इस बार मां हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। इसे सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और ज्ञान का संदेश देने वाला माना जाता है। उन्होंने बताया कि हाथी गणेश का रूप है, इसलिए मां का हाथी पर आगमन खुशहाली का संकेत माना जाता है।
पंडित मिश्र के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 10 अक्तूबर, शनिवार को रात 9:16 बजे शुरू होगी और 11 अक्तूबर, रविवार को रात 9:28 बजे तक रहेगी। इसी के चलते नवरात्र का प्रारंभ 11 अक्तूबर से होगा। कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। चित्रा नक्षत्र का पूर्वार्ध सुबह 10:08 बजे तक और वैधृति योग का पूर्वार्ध सुबह 9:25 बजे तक रहेगा। चित्रा नक्षत्र 10 अक्तूबर की रात 9:38 बजे शुरू होकर 11 अक्तूबर की रात 10:28 बजे तक रहेगा। वैधृति योग 10 अक्तूबर की रात 10 बजे शुरू होकर 11 अक्तूबर की रात 9 बजे समाप्त होगा।
कन्या पूजन का विशेष महत्व
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि देवी व्रत में कुमारी पूजन आवश्यक माना गया है। सामर्थ्य के अनुसार नवरात्र में प्रतिदिन नौ कन्याओं के चरण धोकर देवी स्वरूप में पूजा करनी चाहिए। मान्यता के अनुसार, एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य, दो से भोग और मोक्ष, तीन से धर्म-अर्थ-काम, चार से राज पक्ष से सम्मान, पांच से विद्या, छह से सुख, सात से प्रतिष्ठित पद, आठ से धन-संपदा और नौ कन्याओं के पूजन से राज्य व प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
नवरात्र की तिथियां
11 अक्तूबर: पहला नवरात्र, 12 अक्तूबर: दूसरा, 13 अक्तूबर: तीसरा, 14 अक्तूबर: चौथा, 15 अक्तूबर: पांचवां, 16 अक्तूबर: छठा, 17 अक्तूबर: सातवां, 18 अक्तूबर: आठवां, 19 अक्तूबर: अष्टमी और नवमी, 20 अक्तूबर: नवमी और दशमी।