चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में रविवार को बंगाली नव वर्ष का भव्य आगाज हुआ। इस मौके पर विरासत और पौराणिक गाथाओं का अनूठा संगम की झलक दिखी। नृत्य और संगीत के माध्यम से पश्चिम बंगाल की समृद्ध विविधता, सभ्यता और प्राकृतिक सुंदरता का प्रदर्शन किया गया।
सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी अशोक कुमार सेनगुप्ता ने कार्यक्रम का निर्देशन किया। दो सत्र में कार्यक्रम हुए। इसमें 55 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। पहली प्रस्तुति में अमर रूपसी बांग्ला (मेरा सुंदर बंगाल) और दूसरे सत्र में महाभारत की द्रौपदी की गाथा पेश की गई। इसका लेखन और नृत्य-निर्देशन चंडीगढ़ की सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना एवं शिक्षिका पल्लवी पिंगे ने किया है। पल्लवी पिंगे के साथ वाणी शर्मा, इरा खांबेते, समृद्धि बंसल, जसलीन कौर, अनुषा चड्ढा, प्रीति खांबेते तथा आभा शुक्ला ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति दी।
कलाकारों ने द्रौपदी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं इसमें यज्ञ से जन्म, बाल्यकाल के स्वप्न, स्वयंवर और चीरहरण का अत्यंत मार्मिक और प्रभावशाली चित्रण किया।प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि यज्ञसेनी ने अपने ऊपर हुए अत्याचारों का जिस साहस और दृढ़ता से सामना किया तथा नारी के वस्तूकरण जैसी कुप्रथा पर जिस निर्भीकता से प्रश्न उठाए वे आज भी प्रासंगिक हैं।