चंडीगढ़। गैस सिलिंडर की किल्लत ने लोगों को एक बार फिर पारंपरिक तरीकों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है। गांव कैंबवाला में ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला, जहां एक परिवार अब लकड़ी और उपलों पर खाना बनाने लगा है। अमर उजाला टीम जब गांव कैंबवाला पहुंची तो निर्मला देवी अपने पोते-पोतियों के साथ रसोई में चूल्हे पर खाना तैयार कर रही थीं। उन्होंने बताया कि घर में बेटा, बहू और पोते-पोतियों सहित कुल 12 सदस्य हैं, जिनमें हर महीने करीब दो गैस सिलिंडर की खपत होती है। गैस की किल्लत बढ़ने के बाद अब उन्होंने लकड़ी और उपलों पर खाना बनाना शुरू कर दिया है ताकि सिलेंडर को बचाकर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सके।
निर्मला देवी ने बताया कि पहले पशुओं का गोबर खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब गैस संकट के चलते उससे उपले बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सर्दियों में तो मक्की की रोटी और सरसों का साग चूल्हे पर ही बनाते थे लेकिन अब गर्मी में भी गैस बचाने के लिए यही तरीका अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पशुबाड़े में ही उपले तैयार किए जाते हैं और जरूरत के अनुसार घर में लाए जाते हैं। वहीं, खेतों में लगे पेड़ों की टहनियों का उपयोग ईंधन के रूप में किया जा रहा है। गैस संकट ने एक बार फिर ग्रामीण जीवनशैली की झलक शहर के करीब ला दी है।