चंडीगढ़। कला एवं साहित्य का समाज में योगदान विषय पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया। माैके पर ग्रेट ब्रिटेन से पधारे कलाकार एवं साहित्यकार सुरेश पुष्पाकर ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि जब कोई सभ्यता समय के गर्त में विलीन हो जाती है।
तब उसकी कला और साहित्य ही शेष रहते हैं, जो उस युग की महिमा और विचारों को इतिहास में अमर कर देते हैं। किसी भी समाज की पहचान उसकी कला और संस्कृति से होती है, जो समय के साथ विकसित होकर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनती है। अंत में, प्रेम विज ने सभी का धन्यवाद किया।