वहीं बिलासपुर की विश्व हिंदू परिषद इकाई ने सरस्वती उद्गम स्थल आदिबद्री धाम से अदृश्य सरस्वती नदी का जल और मिट्टी ली। यहां पहाड़ से सरस्वती का पानी निकलता है। विहिप के सेवक देवेन्द्र अरोड़ा, जितेन्द्र मलिक, अभिषेक मलिक ने बताया कि सरस्वती उद्गम स्थल पर पुजारी ने मंत्रों उच्चारण के साथ सरस्वती मां की पूजा अर्चना करवाई। इसके बाद सरस्वती उद्गम स्थल से निकल रही पवित्र धारा से जल लिया। साथ ही सोम नदी, कपालमोचन के पवित्र तीर्थस्थलों सहित आस पास के ऐतिहासिक व प्राचीन धार्मिकस्थलों से जल को एक पात्र में एकत्रित किया गया है। इस मौके पर सुनील सैनी, अभिषेक मलिक, विपिन गुप्ता, ऋषिपाल, रामेश्वर ढींगरा, जितेन्द्र मलिक मौजद रहे।
इन स्थानों से ले जाया गया पवित्र जल और मिट्टी
- सिखों की राजधानी लोहगढ़ साहिब
- तीर्थराज कपाल मोचन
- सूरज कुंड
- गुरु रविदास डेरा बाबा लाल दास मंदिर
- आदिबद्री से सरस्वती का जल
- हथिनीकुंड से यमुना का पवित्र जल
ये है महत्व
कलेश्वर महादेव मंदिर के महंत शांतानंद महाराज ने बताया कि नदियों का जल पवित्र होता है लेकिन गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के जल का विशेष महत्व है। इस जल की विशेषता है कि यह सभी बाधाओं को शांत कर काम को पूरा कराता है। सदियों से यहां के जल का सभी अनुष्ठानों में महत्व रहा है।
यह पवित्र जल किसी भी साधक या आम श्रद्धालु में सतोगुण की मात्रा का विस्तार करने में सक्षम है, इसलिए आदिकाल से ही इन नदियों का जल एकत्रित कर धार्मिक विधि-विधान में प्रयोग किया जाता है। पवित्र जल को पीने से श्रद्धालुओं के भीतर भगवत्ता को अनुभव करने की शक्ति जाग्रत होती है।
आरएसएस के जिला प्रमुख मुकेश गर्ग ने बताया की साधु-संतों एवं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की अगुवाई में यह जल अयोध्या ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की कई पीढ़ियां राम मंदिर के निर्माण की प्रतीक्षा कर रही थीं जो अब साकार होने वाला है।