महिला कांस्टेबल भर्ती मामले में आवेदकों की ऊंचाई मापने में हुई अनियमितता वाली याचिकाओं की बढ़ती संख्या देखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब हरियाणा सरकार से पूछ लिया है कि क्यों न इस मामले में मेडिकल बोर्ड गठित हो। हाईकोर्ट ने ऊंचाई के विवाद से जुड़ी सभी याचिकाओं को साथ में सुनने का निर्णय लिया है।
मेवात निवासी लज्जावती ने एडवोकेट मोहम्मद अरशद के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि बीते साल हरियाणा सरकार ने महिला कांस्टेबलों के एक हजार पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था।
विज्ञापन में भर्ती की शर्तों का भी पूरा उल्लेख था, जिसे शारीरिक मापदंड परीक्षा तक याची ने पूरा किया। मानकों के अनुरूप सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए न्यूनतम 160 सेंटीमीटर और आरक्षित वर्ग के आवेदकों के लिए 157 सेंटीमीटर न्यूनतम ऊंचाई की शर्त रखी गई थी।
याची ने 27 से 30 नवंबर तक हुई इस परीक्षा में भाग लिया, लेकिन 11 अक्तूबर को हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमिशन ने जो सूची जारी की, उसमें याची को फेल दिखाया गया। जब इस बारे में जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि याची की ऊंचाई को 154 सेंटीमीटर दिखाया गया था।
हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमिशन के सचिव को किया गया था तलब
कोर्ट
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याची ने कहा कि उसकी ऊंचाई 161 सेंटीमीटर है, जो सामान्य श्रेणी के लिए रखी गई न्यूनतम ऊंचाई से भी अधिक है, जबकि वह आरक्षित वर्ग से है, जहां शर्त 157 सेंटीमीटर की है। याची ने कहा कि परीक्षा को अभी एक माह ही बीता है और एक माह में किसी की ऊंचाई इतनी कैसे बढ़ सकती है।
इस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए कहा कि इस प्रकार की अनियमितताएं भर्ती को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर रही हैं और आखिर एक माह में किसी की ऊंचाई 6 से 7 सेंटीमीटर कैसे बढ़ सकती है।
हाईकोर्ट ने इस पर नोटिस जारी कर हरियाणा सरकार और स्टाफ सेलेक्शन कमिशन से जवाब मांगा था। इसके बाद लगातार ऊंचाई को लेकर तय मानकों की पालना न होने के आरोपों वाली याचिकाओं का अंबार लग गया। इस पर हाईकोर्ट ने कमिशन के सचिव को तलब किया।
सचिव ने बताया कि ऊंचाई मापने का ठेका एक कंपनी को दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कंपनी से कोई संतुष्ट न हो तो क्या किसी मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था। इस पर सचिव जवाब नहीं दे सके।
हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई को टालते हुए अगली सुनवाई पर एक दिसंबर को इस बारे में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वे उनकेजवाब से संतुष्ट नहीं हुए तो मेडिकल बोर्ड के गठन के आदेश जारी कर देंगे।