-हरियाणा और पंजाब सरकार नियम बनाकर पहले ही भेज चुके हैं केंद्र को
-2017 में मनोरोगियों की भलाई के लिए बनाया गया था मेंटल हेल्थ एक्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्र सरकार की ओर से 2017 में बनाए गए मेंटल हेल्थ एक्ट के बावजूद मनोरोगियों के लिए ग्रुप होम की व्यवस्था न होने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हरियाणा व पंजाब सरकार ने बताया कि नियमों को बनाकर केंद्र के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस जानकारी पर अब केंद्र सरकार को देरी का कारण स्पष्ट करने का निर्देश जारी किया है।
याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ के पुष्पांजलि ट्रस्ट ने बताया कि मनोरोगियों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी होती है जिसे पंजाब व हरियाणा में नहीं निभाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने मनोरोगियों की भलाई के लिए 2017 में एक्ट बनाया था। इस एक्ट में ऐसे लोगों को विशेष सुविधा देने का प्रावधान किया गया था। इस मामले में 2022 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सेक्टर-31 में ग्रुप होम की आधारशिला रखी थी। प्रशासन 90 लोगों की क्षमता वाला ग्रुप होम तैयार कर रहा है, जहां ऐसे लोगों को विशेष देखभाल मिल सकेगी। चंडीगढ़ में एक्ट का पालन हो गया है, लेकिन बार-बार मांग पत्र देने के बाद भी हरियाणा व पंजाब में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है। याची ने बताया कि इसके लिए सर्वे करना आवश्यक होता है और अभी तक सर्वे तक का काम नहीं किया गया है। ऐसे में दोनों राज्यों को मेंटल हेल्थ एक्ट के पालन का निर्देश दिया जाए। साथ ही ग्रुप होम के निर्माण के लिए उचित निर्देश जारी किए जाएं। हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा, पंजाब और यूटी प्रशासन को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। हरियाणा व पंजाब ने बताया कि ग्रुप होम के लिए नियम बना लिए गए हैं लेकिन अभी इसे केंद्र की मंजूरी नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में केंद्र सरकार को देरी का कारण स्पष्ट करने का आदेश दिया है।