लिपिकों बोले, काम नहीं तो वेतन नहीं नियम वापस होने तक नहीं होंगे समिति में शामिल
16 अगस्त को सीएम के साथ हुई बैठक के बाद स्थगित की थी 42 दिनों तक चली लिपिकों ने हड़ताल
चंडीगढ़। वेतनमान को लेकर 42 दिन तक हड़ताल पर रहे लिपिकों की समस्याओं को लेकर सरकार ने बुधवार को पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया। इसमें तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को शामिल करते हुए लिपिक एसोसिएशन को दो दिन में अपने दो प्रतिनिधि इस समिति के लिए नियुक्त करने को कहा है। वहीं, लिपिक एसोसिएशन ने कहा किकाम नहीं तो वेतन नहीं का नियम वापस लेने तक समिति के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं देंगे। हड़ताल की अवधि को ड्यूटी अवधि माने जाने तक समिति का बहिष्कार करेंगे।
हरियाणा में क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसायटी की अगुवाई में लिपिक पांच जुलाई से 15 अगस्त तक हड़ताल पर रहे थे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ हुई बैठक में आश्वासन के बाद लिपिकों ने हड़ताल को स्थगित कर दी थी। सरकार ने पांच सदस्यीय समिति का गठन कर तीन माह में फैसला लेने का आश्वासन दिया था। इसके बाद लिपिक 16 जुलाई को काम पर लौट आए थे। वहीं, अब सरकार ने बुधवार को समिति के गठन के संबंध में पत्र जारी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त विभाग कार्यालय की ओर से जारी पत्र में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पी राघवेंद्र दाव, बिजली निगम चेयरमैन पीके दास व वित्त विभाग में विशेष सचिव आईएएस पंकज सहित क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसायटी के दो प्रतिनिधियों को इस समिति में शामिल किया जाएगा। लिपिक एसोसिएशन को इस समिति में शामिल करने वाले दो प्रतिनिधियों के नाम दो दिन में बताने को कहा गया है। समिति को विभिन्न विभागों में लिपिकों के कार्य, उनकी जिम्मेवारियों व वेतन की मौजूदा एवं आने वाले समय के हिसाब से समीक्षा कर तीन माह में रिपोर्ट देने का काम सौंपा है।
दूसरी ओर क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव करण सिंह मोगा व वरिष्ठ सलाहकार देवेंद्र खुंगा कहा कि जब तक सरकार काम नहीं तो वेतन नहीं का फैसला वापस नहीं लेती, तब तक सरकार की ओर से गठित की जानें वाली समिति का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के समझौते अनुसार हड़ताल की अवधि को ड्यूटी अवधि मानते हुए वेतन जारी नहीं करती, तब तक लिपिक सरकार की ओर से गठित कमेटी का बहिष्कार करेगी। वहीं, लिपिकीय वर्ग दोबारा हड़ताल करने को मजबूर होगा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि सात दिन की छुट्टी ही काटी जाएंगी और 42 दिन का वेतन दिया जाएगा। ऐसा न करके सरकार ने लिपिक वर्ग के साथ धोखा किया है। लिपिकों ने हड़ताल की अवधि को ड्यूटी अवधि मानने के लिए पत्र जारी की करने की मांग की है।