1974 में दिवंगत भगवती प्रसाद गौर ने की थी शुरुआत, आज पोते-पोतियां भी रामलीला में निभा रहें विभिन्न किरदार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। रामलीला केवल भगवान श्रीराम की कथा का मंचन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और पारिवारिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। चंडीगढ़ का गौर परिवार पिछले पांच दशकों से अधिक समय से रामलीला के मंच पर रामभक्ति की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। वर्ष 1974 में शुरू हुआ यह सफर आज तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुका है।
परंपरा की शुरुआत दिवंगत भगवती प्रसाद गौर ने की थी। उन्होंने वर्ष 1974 में सेक्टर-22 स्थित गढ़वाल रामलीला एवं सांस्कृतिक मंडल में भगवान श्रीराम की भूमिका निभाई और करीब 26 वर्षों तक इस किरदार को जीवंत किया। उनके लिए रामलीला केवल अभिनय नहीं, बल्कि आस्था और सेवा का माध्यम थी।
बेटों ने संभाली पिता की विरासत...
भगवती प्रसाद गौर के बाद उनके तीनों बेटों ने परंपरा को आगे बढ़ाया। बड़े बेटे दीपक गौर ने 1997 से 2013 तक लक्ष्मण की भूमिका निभाई। दूसरे बेटे विजय गौर ने 2006 से 2013 तक श्रीराम का किरदार निभाया, जबकि छोटे बेटे अजय गौर ने 2014 से 2018 तक प्रभु श्रीराम की भूमिका अदा की।
पोते-पोतियां भी निभा रहे किरदार...
अब परिवार की तीसरी पीढ़ी भी रामलीला से जुड़ी है। दीपक गौर के बेटे राघव गौर पिछले दो वर्षों से हनुमान जी की भूमिका निभा रहे हैं। बेटी गुनगुन गौर सीता सखी सहित विभिन्न महिला पात्रों का अभिनय करती हैं। अजय गौर के बेटे दायविक गौर भी बचपन से छोटी-छोटी भूमिकाएं निभा रहे हैं।
परिवार की महिलाएं भी आयोजन में सहयोग देती हैं। अजय गौर की पत्नी पिंकी गौर पिछले दो वर्षों से मंच संचालन कर रही हैं। इस तरह गौर परिवार अभिनय और सहयोग के जरिए रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।