चंडीगढ़। शहर में जीएसटी और आबकारी शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में खेल पर यूटी प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। डीसी के निर्देश पर आबकारी एवं कराधान और जीएसटी विभाग की संयुक्त टीमें बड़े कारोबारियों, होटलों, रेस्टोरेंट्स, क्लबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में कर चोरी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े मामलों में खामियां सामने आने के बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार अब तक 58 ऐसे मामलों की पहचान की गई है जिनमें जीएसटी और एक्साइज नियमों के उल्लंघन की आशंका है। इन मामलों में कारोबारियों के बिक्री रिकॉर्ड, खरीद संबंधी दस्तावेज, बिल, वाउचर, टैक्स रिटर्न और आईटीसी क्लेम की विस्तृत जांच की जा रही है। विभाग का विशेष फोकस उन प्रतिष्ठानों पर है जहां वास्तविक कारोबार और घोषित आय के बीच अंतर होने की संभावना है।
आबकारी विभाग ने हाल ही में सेक्टर-7 के चर्चित द वॉल्ट क्लब का बार लाइसेंस रद्द किया था। विभाग की इस कार्रवाई को नियमों के उल्लंघन के मामलों में प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों और कारोबारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
जांच के दायरे में सेक्टर-9 का क्लासिक-44, एक नामी हेयर सैलून, मैसर्स बिट्टू फैशनर्स, छोटू मोटू फर्म और रोही मार्बल सहित कई कारोबारी प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन संस्थानों के वित्तीय दस्तावेजों, टैक्स रिकॉर्ड और लेन-देन की बारीकी से जांच की जा रही है। विभाग के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद कई मामलों में नोटिस जारी किए जा सकते हैं और नियमों के तहत जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
शराब ठेकों, क्लबों और होटलों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
डीसी के आदेश पर आबकारी विभाग की टीमों ने शहर के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट, क्लब और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जांच अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में टीम ने हल्लोमाजरा स्थित एक गोदाम पर कार्रवाई करते हुए बिना लाइसेंस खुले में शराब बेचने के अड्डे का भंडाफोड़ किया था। मौके से हजारों बोतलों का स्टॉक बरामद किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह शराब शहर के विभिन्न ठेकों से खरीदी गई थी लेकिन उसके संबंध में कोई वैध रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। अब विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि शराब की खरीद, परिवहन और बिक्री में किन-किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन हुआ।
क्लब मालिक खरीद और खपत का रिकॉर्ड भी नहीं रखते
विभागीय अधिकारियों के अनुसार क्लब, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को निकटवर्ती शराब ठेकों से स्टॉक खरीदने की अनुमति है लेकिन कई संचालक खरीद और खपत का पूरा रिकॉर्ड नहीं रखते। आशंका है कि कुछ संस्थान कम टैक्स और एक्साइज ड्यूटी दिखाने के उद्देश्य से बिक्री और खरीद के आंकड़ों में हेरफेर कर रहे हैं। इसी कारण अब इन प्रतिष्ठानों के बिल-वाउचर, सेल्स रजिस्टर, परचेज रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर की विस्तार से जांच की जा रही है।
आईटीसी में हेराफेरी करने वालों पर विशेष नजर
आबकारी एवं कराधान आयुक्त निशांत कुमार यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कर चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में हेराफेरी करने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी न बरती जाए। उन्होंने कहा कि कुछ कारोबारी गलत तरीके से आईटीसी का लाभ लेकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक कारोबार और मुनाफे को छिपाकर टैक्स देनदारी कम दिखाई जाती है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार के राजस्व हितों की रक्षा और कर व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग के मुताबिक इस अभियान से न केवल कर चोरी पर अंकुश लगेगा बल्कि जीएसटी और आबकारी व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।