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रंगमंच पर कश्मीरी पंडितों के पलायन का दर्द देख छलकीं दर्शकों की आंखें

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नाटक
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चंडीगढ़। नब्बे के दशक में अलगाववादी शक्तियों के दबाव के चलते कश्मीरों पंडितों का घाटी छोड़कर पलायन करने की घटना को रंगमंच के कलाकारों ने मंच पर ऐसे बयां किया कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। थियेटर फेस्टिवल के तीसरे दिन सोमवार को टैगोर थियेटर में नाटक ‘खामोशी सीली सीली’ का मंचन किया गया। नाटक में अपने सपनों में जीती पांच बेटियों के साथ रहते सरल स्वभाव के नानबाई पृथ्वीनाथ परंपराओं और अंतरात्मा के द्वंद्व में फंसे हैं। इसमें पृथ्वीनाथ को कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करता दिखाया गया है। इस नाटक का मंचन राष्ट्रीय नाटक विद्यालय रंगमंडल की ओर से चंडीगढ़ संस्कृति विभाग और टैगोर थिएटर सोसायटी के सहयोग से किया गया।
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इसमें दिखाया गया है कि पृथ्वीनाथ अपनी बेटियों से बहुत प्यार करता है। इसमें पृथ्वी का एक मध्यम वर्गीय परिवार व परंपराओं और रिवायतों को मानने वाला दिखाया गया है। लेकिन अपनी बेटियों के लिए वह जाने अनजाने अपनी रिवायतों के साथ समझौता करता है। अपने मजहब में परंपराओं को छोड़ते हुए वह लड़कियों को उनकी पंसद के अनुसार विवाह करने की अनुमति दे देता है। लेकिन पृथ्वी की तीसरी बेटी शुहुल अपनी कौम से बाहर एक मुस्लिम लड़के के साथ मोहब्बत कर बैठती है। इसके साथ ही वह पृथ्वी की अनुमति के बिना मुस्लिम लड़के से निकाह भी कर लेती है। इसी दौरान वादी में अलगाववादी शक्तियां गैर मुस्लिम लोगों पर जुल्म ढाने शुरू कर देते हैं। बाद में अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडितों को वादी छोड़ने का फरमान आ जाता है। ऐसे में वे काफी दुखी हो जाते हैं। इसके साथ ही दो घंटे के नाटक का अंत रुंदे हुए गले के साथ गाने के साथ होता है। इसमें सभी कलाकार रोते हुए दिखाए जाते हैं।
यहूदी परिवार की कहानी से प्रेरित है नाटक
‘खामोशी सिली सीली’ अमेरिकी नाटककार जोसेफ स्टेन के नाटक ‘फिडलर ऑन द रूफ’ का हिंदी अनुवाद है। जोसेफ ने नाटक में बीसवीं सदी में एक यहूदी परिवार के विस्थापन को संगीतमय प्रस्तुित के रूप में पेश किया था। इस नाटक पर हॉलीवुड में फिल्म भी बन चुकी है। इसे निर्देशक सुरेश शर्मा ने रूस और यहूदी परिवेश से बाहर निकालकर कश्मीर के परिप्रेक्ष्य में सरल कहानी के रूप में दर्शकों के सामने पेश किया है।
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ये कलाकार रहे शामिल
मंच पर शाहनवाज खान, महेंद्र सिंह, श्रुति मिश्रा, सम्पा मंडल, अपराजिता डे, सुखिनजीत कौर, रुक्मिणी सरकार, अर्पणा मेनन, बोरनाली बोराह, दीप कुमार, सिकंदर कुमार, राजीब कलीता, निरंजन कुमार नाथ, राजू रॉय, धूताड़मल रवि बाबासाहेब, विवेक इम्मानेनी, मजिबुर रहमान, नवीन सिंह ठाकुर, सिद्धेश्वर काशीनाथ थोराट, राघवेंद्र प्रताप सिंह और धर्म सिंह बिष्ट कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
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