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7 युवाओं की जिंदादिली, जोश और जज्बे से बना डाला देश का पहला व्हीलचेयर म्यूजिकल बैंड

Fri, 22 Nov 2019 12:23 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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म्यूजिकल बैंड - फोटो : अमर उजाला
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बेशक इनका शरीर मुश्किलों का सामना कर रहा है, लेकिन उनके जोश और हौसले का कोई सोनी नहीं। अपने कला के दम पर आज के लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। जी हां! हम बात कर रहे हैं 7 ऐसे युवाओं के बारे में, जिनके शरीर का काफी हिस्सा काम नहीं करता। इसके बावजूद इन्हाेंने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
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इन सभी ने ‘फ्लोइंग करमा’ नाम से संगीत का बैंड व्हील चेयर बनाया है। यह अपनी तरह का देशभर में एकमात्र व्हील चेयर बैंड है। यह बैंड शुक्रवार को सेक्टर- 28 में स्पाइनल रीहैब में एक संगीतमय शाम में बॉलीवुड गायक तोची रैना के साथ परफॉर्म करेगा। यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से शुरू होगा। कार्यक्रम में प्रवेश निशुल्क है।

जिन सात युवाओं ने यह बैंड बनाया है वह सभी रीढ़ की हड्डी और ब्रेन इंजरी जैसी गंभीर दिव्यांगताओं के चलते पुनर्वास (रीहबिलिटेशन) के दौर से गुजर रहे हैं। बैंड के सभी सदस्य युवा हैं और अधिकांश की उम्र 20 साल के आसपास है। बैंड के सभी सदस्य शारीरिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद जिदांदिली का अहसास कराते हैं।
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गीत-संगीत के जरिये जिंदगी में भर रहे हैं रंग
सेक्टर- 28 स्थित स्पाइनल रिहैब संस्थापक एवं सीईओ निक्की पी. कौर ने बताया कि बैंड में शामिल अधिकतर सदस्यों का शरीर का काफी हिस्सा डेमेज हो चुका है, बावजूद इसकेसभी अपनी जिंदगी में रंग चाहते हैं। यह गायन और संगीत के जरिए अपनी जिंदगी को नए पंख देने में जुटे हैं।

निक्की ने बताया कि इनके सेंटर में त्रिदीब चौधरी इलाज के आया था, इस दौरान उसने गिटार पर अभ्यास करना शुरू कर दिया। उसने सोचा कि वह एक ग्रुप बनाए। इसके चलते सेंटर के अन्य सदस्य भी जुड़ गए। मात्र दो महीने पहले ही कड़ी मेहनत के जरिए फ्लोइंग करमा नाम से संगीत का बैंड व्हील चेयर बनाया है।
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सात ‘जांबाज’ कलाकारों का परिचय

त्रिदीब चौधरी: बैंड लीडर त्रिदीब चौधरी ने बताया कि एक हादसे में बुरी तरह से गिरने के बाद वे पेराप्लेजिक का शिकार हो गए। इस वजह से शरीर के निचले अंगों ने काम करना बंद कर दिया। जिंदगी में अंधेरा छा गया। सिटी के रीहैब सेंटर में आने के बाद उनकी हालात बेहतर हुई। उसके बाद यहां पर गिटार का अभ्यास करना शुरू कर दिया। गिटार का ऐसा जुनून छाया कि उसे जिंदगी का हिस्सा बना लिया।

संदीप सिंह: संदीप सिंह बैंड में कीबोर्ड बजाते हैं और लीड सिंगर (मुख्य गायक) हैं। दो साल पहले उन्हें गोली लगी थी, जिससे वे पैराप्लेजिक हो गए थे। जब वे चंडीगढ़ के स्पाइनल रिहैब में आए थे तो पूरी तरह से बिस्तर पर थे। धीरे धीरे उनकी हालत में सुधार हुआ। वे अपनी जिंदगी को एक बार फिर से अपनी जीना चाहते हैं। इनकी संगीत में भी गहरी रुचि थी, यही वजह है कि वे फ्लोइंग करमा का हिस्सा बना गए।

आशीष वर्मा: आशीष वर्मा गिटार प्ले करते हैं और वह तोची रैना के साथ मंच पर गिटार बजाने के लिए तैयार हैं। वह भी तब जब वे हाल ही में आईसीयू से बाहर आए हैं। वह एक हादसे का शिकार होने के बाद बीते छह साल से पेराप्लेजिक हैं। आशीष वर्मा ने वह संगीत के साथ अपना हुनर दिखाने के लिए तैयार हैं।

राजीव कुमार: बैंड के सबसे युवा सदस्य राजीव कुमार हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के निवासी हैं। लगभग 6 साल पहले एक पेड़ से गिरने के बाद वे (शरीर के कई अंगों का प्रभावित हो गए) अपने हाथों के साथ-साथ पैरों का भी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। हाथों में बैंडेज बांधकर उनसे म्यूजिक यंत्र को पकड़ कर संगीत बजाते हैं।

राहुल सिंहः राहुल सिंह, लखनऊ से हैं और बीटेक की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं। अपनी परीक्षा देने के लिए जाते समय, वह एक दुर्घटना का शिकार हो गए। इससे उनकी रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) में गंभीर चोटें आईं। स्पाइनल रिहैब ने उनके लिए एक ऑक्टोपेड खरीदा, लेकिन शरीर के अधिकतर अंग काम नहीं करते और वह स्टिक भी ठीक तरह से पकड़ नही पाते हैं। उनकी टीम ने उनकी स्टिक को मॉडिफाई किया और जिससे वह अब प्ले करते हैं।

शुभम: स्विमिंग पूल के गहरे पानी में एक ड्राइव लगाने के दौरान 26 साल के शुभम हादसे का शिकार हो गए और अब उनके हाथों पैरों पर कोई नियंत्रण नही है। कड़ा अभ्यास के बाद वह माउथ अर्गेन बजाते हैं।

अजय राज: 2006 में एक बाइक चलाते हुए सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। इस दुर्घटना ने उसे पूरी तरह से घायल कर दिया। वह अपने हाथ पैरों से कोई काम नहीं ले पाते हैं। इसके बावजूद हौसला नहीं छोड़ा और अपनी चिन (ठोढ़ी) के जरिए म्यूजिकल यंत्र का बजाते हैं।
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