चंडीगढ़। धार्मिक प्रथाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए नगर निगम ने शुक्रवार को विसर वाहन शुरू कर एक अनूठी पहल की है। विशेष रूप से तैयार की गई यह गाड़ी लोगों की तरफ से पेड़ों के पास और खुले क्षेत्रों में छोड़ी गई देवताओं की मूर्तियां, देवी-देवताओं की तस्वीरें और चुनरियों को एकत्रित करेगी। मेयर अनूप गुप्ता और आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने शुक्रवार को सेक्टर-19 स्थित काली माता मंदिर से वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
अधिकारियों ने बताया कि इन वस्तुओं को आरआरआर केंद्र में एकत्र किया जाएगा। पीओपी मूर्तियों को एक समर्पित जल टैंक में विसर्जित किया जाएगा। चुनरी को महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से एकत्र किया जाएगा और देवताओं के लिए कपड़े के रूप में सिल दिया जाएगा और चित्रों का उपयोग पपीयर-माचे तकनीक का उपयोग करके ट्रे और पूजा सामग्री बनाने के लिए किया जाएगा। इस विशेष वाहन में तीन केबिन हैं, जिनमें मूर्ति, फोटो फ्रेम और चुन्नियों के लिए एक-एक केबिन है ताकि इसे विशेष देखभाल के साथ संग्रह केंद्र में जमा किया जा सके। इकट्ठा किए गए सामग्रियों से पूजा की थाली, धार्मिक प्रतीक, फोटो फ्रेम, ट्रे, मोमबत्ती स्टैंड और धूपबत्ती स्टैंड जैसी सजावटी वस्तुएं बनाई जाएंगी। चुन्नी से अन्य पुनः उपयोगी उत्पाद भी बनाए जाएंगे।
165 चिह्नित स्थानों से इकट्ठा की जाएगी सामग्री
मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि इस पहल का लक्ष्य 165 चिह्नित स्थानों, विशेष रूप से पीपल और बरगद के पेड़ों के नीचे छोड़े गए धार्मिक प्रतीकों को इकट्ठा करना और उन्हें पवित्र कला में बदलना है। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए धार्मिक प्रथाओं की पवित्रता के संरक्षण पर जोर देगी। आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि यह पहल अन्य शहरों के लिए मॉडल के रूप में कार्य करेगी। इस पहल का दोहरा प्रभाव होगा। पहला, यह सुनिश्चित करेगा कि पेड़ों के नीचे की जगह साफ हो और दूसरा, धार्मिक भावनाओं को बनाए रखते हुए लंबे समय से फेंकी गई पूजा सामग्री का उचित प्रबंधन किया जाएगा।