चंडीगढ़। बचपन में पहाड़ों, जंगलों और नहर के किनारे जाकर मिट्टी पर और कोयले से दीवारों पर धुंध, बर्फ और वृक्षों के चित्र उकेरा करता था। मेरे अंदर समाई कला में कुदरत का बहुत बड़ा योगदान है। यह बात राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित विजुअल आर्टिस्ट्स अश्विनी कुमार ने सोमवार को टीएफटी फेस्ट के तहत रूबरू कार्यक्रम में कही। बता दें देशभर में 93 के करीब वर्कशॉप दे चुके अश्विनी 37 ग्रुप एग्जीबिशन और 27 सोलो एग्जीबिशन के साथ प्रख्यात विजुअल आर्टिस्ट की सूची में शुमार हैं। उनकी ओर से बनाई लगभग 11 पेंटिंग आज गवर्नर हाउस की शोभा बढ़ा रही है और सीएम हाउस की दीवारों पर भी उनकी पेंटिंग जीवन के रंग बिखेर रही हैं।
शहर के कलाप्रेमियों और कलाकारों को उन्होंने होशियारपुर के उरमटांडा गांव से लेकर मंच तक पहुंचने की कहानी साझा की। उन्होंने बताया, जब वह फाइन आर्ट्स में एमए के स्टूडेंट थे तो अपने शिक्षक सीएल शर्मा के कहने पर अपनी एक पेंटिंग अमृतसर में हो रही एग्जीबिशन में भेज दी। शायद यहीं से कला जीवन को एक नया मोड़ मिला था। पूरे पंजाब से आई हजारों पेंटिंग्स में से उनकी पेंटिंग को प्रथम पुरस्कार मिला, वह भी 500 रुपये के साथ।
उन्होंने बताया शायद साधारण से सुनार परिवार में पिता के साथ खाली समय में गोल्ड डिजाइनिंग में हाथ बटाने वाले वह नन्हे हाथ कैनवस पर जिंदगी के रंग भरने के लिए बने थे और जिंदगी ने भरपूर मौके भी दिए। जालंधर के केंद्रीय विद्यालय- 3 में हेड ऑफ डिपार्टमेंट फाइन आर्ट्स में पिछले 32 सालों से कार्यरत अश्विनी ने बताया कि उन्हें पेंटिंग करने की प्रेरणा कॉलेज समय में अपने ही टीचर चरणजीत कौर से मिली, जिनकी पेंटिंग्स में उन्हें एक अलग ही दुनिया दिखाई देती थी। उन्होंने खाली समय में ज्यादा से ज्यादा समय चरणजीत कौर के सानिध्य में और उनकी पेंटिंग्स के साथ बिताना शुरू कर दिया।
उन्होंने बताया रंगों के इन सपनों को और ऊंची उड़ान तब मिली जब 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने दिल्ली में नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया। अब तक देशभर में ऑल इंडिया स्तर और स्टेट लेवल के लगभग 45 अवार्ड अपनी झोली में डाल चुके उन्होंने कहा कि रंगमंच की दुनिया में भी अनेकों रंग है जरूरत है तो बस उन रंगों को समझने और परखने की ।