सेक्टर-35 के प्राचीन कला केंद्र में रविवार को बसंत पंचमी पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्कार भारती चंडीगढ़ एवं बृहस्पति कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। काव्य गोष्ठी में ट्राइसिटी के 35 कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं। शुभारंभ भजन गायक नरेंद्र निंदी ने मां सरस्वती की वंदना से किया। मौके पर डॉ. अनीश गर्ग, कवि नवीन नीर मौजूद रहे। संस्कार भारती के अध्यक्ष यशपाल ने सभी अतिथियों का आभार जताया।
डॉ. अनीश गर्ग ने धरा के हनन और खनन पर कटाक्ष करते हुए कविता पेश की। उन्होंने हरियाली के रंग हो रहे उड़ंत, वसंत है या धरा का बस अंत... पेश कर वाहवाही लूटी। पुनीत मदान ने कभी जो शजर की शाखाओं का आकर्षण था। उसकी जड़ों में विलीन, अब उसका पोषण हूं मैं, फूल हूं मैं..., पेश की। नवीन नीर ने अभी से आ गए लेकर वो हाथ में पत्थर, अभी तो मैंने उन्हें आइना दिखाया नहीं..., डेजी बेदी ने ना भला कीजिए ना बुरा कीजिए, बस दुआओं में हमको रखा कीजिए..., डाॅ. पूनम गुप्ता ने फिर बौरों से लदी, आमों की हर डाली, फिर भौंरों ने छेड़ी कलियां ये मतवाली..., विजय सचदेवा ने मौसम की मस्तियां हैं या अरमानों की बारिशे हैं, बुझते हुए दियो में यह रोशनी की ख्वाहिशे हैं...पेश कर तालियां बटोरीं।