फास्टैग की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। चंडीगढ़ सेक्टर 44 निवासी प्रशांत लूथरा ने 24 नवंबर को प्राइवेट बैंक एचडीएफसी वेबसाइट के माध्यम से फास्टैग को अप्लाई किया। 27 नवंबर को बैंक ने उनका ई-वॉलेट बनाया और उनके एकाउंट से 500 रुपये ले लिए। 200 रुपये सिक्योरिटी के और 300 रुपये वॉलेट के लिए। इसके साथ ही जानकारी दी गई कि दस दिन बाद फास्टैग मिल जाएगा। आवेदन को पूरे 40 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें फास्टैग नहीं मिला है। इसके विपरीत उनके अकाउंट से पूरे 300 रुपये भी कट गए हैं।
प्रशांत का कहना है कि उन्हें दो जनवरी से मोबाइल पर मैसेज आ रहे हैं कि उनकी गाड़ी दप्पड़ टोल प्लाजा से निकली है। टोल प्लाजा से पार करते उनके अकाउंट से 90 रुपये कट गए। प्रशांत की गाड़ी चार टोल प्लाजा से गुजरी और उनके एकाउंट से पैसे कटते रहे। धीरे-धीरे उनका पूरा वॉलेट खाली हो गया। इस बारे में उन्होंने एचडीएफसी से संपर्क करने की कोशिश की। उन्हें मेल किए। टोल फ्री नंबर पर कॉल की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशांत ने टोल प्लाजा के अधिकारियों से भी संपर्क किया।
अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन हासिल किए जा रहे फास्टैग से उनका कोई लेना-देना नहीं है। प्रशांत का कहना है कि फास्टैग के नाम पर धोखे के साथ सुरक्षा का भी खतरा है। गाड़ी उनकी घर पर खड़ी। फास्टैग मिला नहीं। फिर भी पैसे कटते जा रहे हैं। इस बारे में न तो बैंक बोलने के लिए तैयार है और न ही फास्टैग से संबंधित अधिकारी। उनका कहना है कि जब उन्होंने बैंक के फेसबुक पेज पर जाकर देखा तो सैकड़ों लोगों ने अपनी शिकायत दे रखी थी। इससे पता चलता है कि लोग कितने परेशान हैं।