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Chandigarh News: 68 लाख का बिल था... मेस संचालक को 2.05 करोड़ का कर दिया भुगतान

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चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 में मेस का संचालन करने वाली कंपनी के 68 लाख रुपये के बिल की जगह स्वास्थ्य विभाग ने 2.05 करोड़ रुपये पास कर दिए। गड़बड़ी सामने आने पर आनन-फानन कंपनी को बिना भुगतान अगले कुछ महीने काम करने का निर्देश दिया गया है। गलत बिल पास करने वालों कर्मचारियों व अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी नहीं दी जा रही। मेस संचालक पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब इस गड़बड़ी पर ऑडिट विभाग ने आपत्ति लगा दी है। विभाग के आला अधिकारियों ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।
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ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि आंतरिक रोगियों (आईपीडी) के लिए आहार सेवाओं से संबंधित रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि अनुबंध संख्या के तहत फर्स्ट पार्टी प्रिंसिपल, मेडिकल ऑफिसर, जीएमएसएच सेक्टर-16, चंडीगढ़ और सेकेंड पार्टी प्राइम सर्विसेज नई दिल्ली के बीच एक अनुबंध किया गया था। मरीजों को भोजन और आहार सेवाओं की आपूर्ति 15 नवंबर 2022 से शुरू हुई। ठेकेदार ने जनरल वार्ड में कुल 47621 आहार उपलब्ध कराए। ठेकेदार ने अस्पताल के निजी वार्ड में 1295, आईसीयू वार्ड में 1076 और कोविड-19 वार्ड समेत आइसोलेशन वार्ड में 264 डाइट उपलब्ध कराए लेकिन ठेकेदार को जनरल वार्ड के कुल 143930, निजी वार्ड के 3682 और आईसीयू वार्ड के 3181 डाइट के बिल जारी किए गए। आइसोलेशन एवं कोविड-19 वार्ड में उपलब्ध कराए जाने वाले आहार के लिए किसी राशि का दावा नहीं किया गया। तय मानक के अनुसार देय भुगतान राशि केवल 68 लाख 31 हजार 862 रुपये हुआ जबकि ठेकेदार को दो करोड़ 5 लाख 8 हजार 635 रुपये की राशि का भुगतान किया गया।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का पक्ष जानने के लिए स्वास्थ्य निदेशक सुमन सिंह को रविवार शाम दो बार मैसेज भेजा गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

ठेकेदार से बिजली-पानी का बिल भी नहीं लिया
ऑडिट के दौरान यह भी पाया गया कि इसके अलावा अनुबंध के अनुसार, बिजली शुल्क और पानी शुल्क ठेकेदार द्वारा प्रदान किया जाना था क्योंकि अस्पताल ने भोजन तैयार करने के लिए जगह और सभी सुविधाएं प्रदान कीं थीं। अस्पताल ने ठेकेदार को न तो बिजली-पानी के शुल्क के लिए कोई बिल जारी किया और न ही ठेकेदार द्वारा आपूर्ति किए गए आहार के भुगतान से बिजली-पानी के बिल की कटौती की। यह भी देखा गया कि सेवा/अनुबंध के प्रारंभ में ठेकेदार को बर्तन और कुछ खराब होने वाली वस्तुएं भी प्रदान की गईं लेकिन अस्पताल ने बर्तनों का किराया और खराब होने वाली वस्तुओं की कीमत भी नहीं वसूली।
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गड़बड़ी पर पर्दा डालने का अजीब उपाय
इस संबंध में आपत्ति उठने पर विभाग ने बताया कि अधिक भुगतान की गई राशि को समायोजित करने के लिए ठेकेदार को 22 मई 2023 के बाद का भुगतान रोक दिया गया है। मई 2024 तक समायोजन के लिए ठेकेदार को बकाया एक करोड़ 38 लाख 87 हजार 892 रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा विभाग के पास ठेकेदार की 67 लाख 83 हजार 495 रुपये की बैंक गारंटी भी थी, जो समायोजन के लिए उपलब्ध है। ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उपरोक्त मुद्दे पर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई एवं अनियमित भुगतान के अंतिम समायोजन की प्रतीक्षा रहेगी।

क्या कहता है नियम
सामान्य वित्तीय नियम 2017 के नियम-21 में कहा गया है कि वित्तीय औचित्य के मानकों के अनुसार, सार्वजनिक धन से व्यय करने या अधिकृत करने वाले प्रत्येक अधिकारी को वित्तीय औचित्य के उच्च मानकों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। प्रत्येक अधिकारी को वित्तीय व्यवस्था और सख्त अर्थव्यवस्था को भी लागू करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि सभी प्रासंगिक नियमों और विनियमों का उसके अपने कार्यालय और अधीनस्थ संवितरण अधिकारियों द्वारा पालन किया जाए। जिन सिद्धांतों पर आम तौर पर जोर दिया जाता है उनमें अन्य बातों के साथ-साथ यह भी शामिल है कि प्रत्येक अधिकारी से सार्वजनिक धन से किए गए व्यय के संबंध में उतनी ही सतर्कता बरतने की अपेक्षा की जाती है जितनी सामान्य विवेक वाला व्यक्ति अपने स्वयं के धन के व्यय के संबंध में बरतता है।
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