चंडीगढ़। सेक्टर- 35 के प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में रविवार को संगीतमय कार्यक्रम स्वर सरिता का आयोजन हुआ। यह आयोजन प्राचीन कला केंद्र एवं बृहस्पति कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम आधुनिक वाग्गेयकार स्वर्गीय आचार्य बृहस्पति की स्मृति को समर्पित था।
कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति युवा शास्त्रीय गायिका शर्मिष्ठा छेत्री (चक्रवर्ती) ने दी। उन्होंने राग यमन से कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए आचार्य बृहस्पति की रचित तीन बंदिशों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। विलंबित एकताल की बंदिश काहे अलसाने हो लाल, तीनताल की मंगल करहु दया करि देवी तथा द्रुत एकताल की दीन बंधु दीनानाथ ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामपुर-सतारंग परंपरा की गायकी शैली में प्रस्तुत आलाप, बोलबांट, सरगम और तानों ने उनकी साधना और प्रतिभा का परिचय दिया।
इसके बाद उन्होंने संत कबीर का प्रसिद्ध भजन मोको कहां ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में प्रस्तुत किया। इसकी स्वर-रचना उनके गुरु प्रो. सौभाग्यवर्धन बृहस्पति ने की है। भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति से सभागार भक्तिमय वातावरण में डूब गया। तबले पर डॉ. महेंद्र प्रसाद शर्मा और सारंगी पर राजेश ने संगत की। समापन अवसर पर केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर ने कलाकारों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।