सेक्टर-19 के कपड़ा कारोबारी असीम सचदेवा का कहना है कि इस बार बाजार में ग्राहकों की संख्या काफी अधिक है। सिल्क के कपड़ों में कई नई वैरायटी उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि करवा चौथ, दिवाली और शादी के सीजन के कारण बाजार में खरीदारों की भीड़ है। इस बार कारोबार पिछले सालों की तुलना में अधिक होने की उम्मीद है।
कपड़े सिलवाने का क्रेज बरकरार
रेडीमेड कारोबार बढ़ने के बावजूद टेलर से कपड़े सिलवाने का शौक कम नहीं हुआ है। सेक्टर-17 स्थित कोहिनूर टेलर्स के मालिक बलविंदर सिंह का कहना है कि कपड़ा खरीदकर सिलवाने वाले ग्राहक अभी बड़ी संख्या में हैं। उनके यहां आम शर्ट-पैंट की सिलाई 1900 रुपये से शुरू होती है। उन्होंने बताया कि कई ग्राहक केवल कपड़े 30 हजार रुपये तक के खरीदते हैं। अभी भी शौकीन और उच्च वर्ग अपनी पसंद की फिटिंग करवाकर कपड़ा पहनना पसंद करता है।
सेक्टर-21 के होलसेल कारोबारी चरणजीव सिंह ने बताया कि उनका रेडीमेड कपड़ों का थोक व्यापार है। पहले 1000 रुपये तक के कपड़ों पर 5 फीसदी जीएसटी लगता था पर अब यह सीमा 2500 रुपये तक कर दी गई है। इससे ग्राहकों को 220 से 250 रुपये तक की सीधी बचत है, जो मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत है।
त्योहारी सीजन से उम्मीदें बढ़ीं
सेक्टर-17 के शूट मास्टर शोरूम के मालिक राजकुमार गंभीर ने बताया कि त्योहारों के कारण बाजार का माहौल बहुत सकारात्मक है। ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में अधिक हुई है। उन्होंने कहा कि रेडीमेड पर जीएसटी घटने से लोगों की बचत बढ़ी है, जिससे कपड़ों की खरीददारी में और तेजी आने की संभावना है। उम्मीद है कि दिवाली से कुछ दिन पहले बाजारों में और अधिक रौनक देखने को मिलेगी। कुछ कारोबारियों की राय थोड़ी अलग भी है। उनका कहना है कि बाजार में कुछ चुनिंदा ग्राहक बचे है। लोगों की आय और रोजगार पर असर पड़ने से नए और बड़े कस्टमर कम आ रहे है। लोगों की आय अगर साल दर साल बेहतर नहीं होगी तो खरीददारी पर असर पड़ना तय है।