घाटी में रिमोट एरिया के कई गांव ऐसे हैं, जहां आतंकियों की दहशत इतनी ज्यादा है कि परिवार के लोग गांव तक में इस बात का जिक्र नहीं करते कि उनका बेटा फौज में है। गांववालों व पड़ोसियों को सिर्फ यही बताया जाता है कि उनका बेटा बाहर काम करता है।
यदि इस बारे में मालूम चल जाए तो आतंकी न केवल परिवार पर उनके बेटे को सेना छुड़वाने के लिए दबाव बनाते हैं, बल्कि संबंधित जवान को भी निशाने पर ले लेते हैं। इन मसलों पर शोधकर्ता लेखिका भावना अरोड़ा ने बताया कि आतंकी जवानों को भी धमकाते हैं। कुछ केसों में तो ऐसे जवानों को अगवा कर उनकी हत्या भी की गई है।
- आतंकियों ने 27 सितंबर 2017 को बीएसएफ के कांस्टेबल रमजान पारे को घर में घुसकर मार दिया था।
- 22 जून 2017 को श्रीनगर के डीएसपी मोहम्मद आयूब पंडित को 22 जून 2017 को मार दिया गया गया था।
- टेरिटोरियल आमी के राइफल मैन इरफान अहमद की 25 नवंबर 2017 को शोपियां में अगवा कर हत्या कर दी गई।
- 9 मई 2018 को दो राजपूताना राइफल के लेफ्टिनेंट उमर फैयाज को पैतृक गांव बीहीबाग से अगवा कर हत्या कर दी गई।
- 14 जून 2018 को 44 आरआर के राइफलमैन औरंगजेब को पुलवामा से अगवा कर हत्या कर दी गई।
- 5 जुलाई 2018 को कुलगाम से कांस्टेबल जाविद अहमद डार को अगवा कर हत्या कर दी गई, इसके अलावा भी 2 अन्य घटना भी इसी तरह हो चुकी है।