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Chandigarh News: कुत्तों का आतंक, बच्चों-बुजुर्गों का बाहर निकलना हुआ मुश्किल

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चंडीगढ़। शहर में इन दिनों कुत्तों की काटने की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। लोग सहमे हुए हैं। रोजाना कुत्तों के काटने के दर्जनों केस अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक खतरा मासूम बच्चों और बुजुर्गों पर है, जिन्हें देखते ही कुत्तों का झुंड हिंसक हो रहा है लेकिन नगर निगम के अधिकारी आंखें बंद कर बैठे हुए हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत करने पर उनका रवैया ठीक नहीं है। कुत्तों की समस्या शहर के एक इलाके में नहीं है। सेक्टर-11, 22, 23, 24, 25, 32, 42सी, 46, 47, 49, मनीमाजरा समेत शहर के लगभग सभी हिस्से इससे प्रभावित हैं। प्रमुख सड़कों के साथ गलियों में भी कुत्ते झुंड में बैठे रहते हैं। ये न सिर्फ बच्चों व बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं बल्कि युवाओं को भी अपना शिकार बना रहे हैं। यही हाल रात के अंधेरे में बाइक से घर लौटने वाले चालकों का है, जिन्हें देखते ही कुत्ते दौड़कर हमला करने की कोशिश करते हैं। स्वयं को बचाने के फेर में बाइक चालक अनियंत्रित होकर हादसे के शिकार भी हो रहे हैं। दूसरी तरफ नगर निगम कुत्तों की समस्या को लेकर कितना गंभीर है, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल से रायपुरकलां में बनने वाला एडवांस एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर शुरू नहीं हो पाया है। लोग लावारिस कुत्तों को रोटी व अन्य खाने-पीने का सामान डालते हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी लेने से पीछे भागते हैं।
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पार्क में टहलने, मार्केट जाने से डर रहे हैं लोग
कुत्तों की वजह से बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि वह बाहर निकलने हैं तो कुत्ते झपट पड़ते हैं। न सिर्फ आवारा कुत्ते बल्कि लोग पालतू कुत्तों का भी शिकार हो रहे हैं। अमर उजाला शहर के अलग-अलग हिस्सों में आपके द्वार कार्यक्रम आयोजित करता है, उसमें भी लोगों ने कुत्तों की समस्या पर नगर निगम को ध्यान देने को कहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अभी कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि गर्मियों के दिनों में तेज धूप और पानी नहीं मिलने की वजह से कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। बता दें कि कुत्तों के काटने से हाइड्रोफोबिया (रेबीज का लक्षण) होता है। 24 घंटे के भीतर एंटी रेबीज का टीका लगाना बेहद जरूरी है, नहीं तो वायरस फैलने का खतरा बना रहता है। ये जानलेवा होता है।

केस -1
सेक्टर-49 में रहने वाले अशोक पासवान को दो दिन पहले घर के पास ही पिटबुल ने काट लिया। वह किसी रिश्तेदार से मिलकर घर जा रहे थे, तभी पीछे से पड़ोस के एक पालतू पिटबुल ने उन्हें काट लिया। इसके बाद वह तुरंत सेक्टर-45 के अस्पताल गए और टीका लगवाया। उन्होंने कहा कि इलाके में कुत्तों की समस्या बहुत ज्यादा है। लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
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केस-2
सेक्टर-42सी में रहने वाले अमरिंदर सिंह ने बताया कि उनके घर के पास हमेशा तीन-चार कुत्ते बैठे रहते हैं। वह शनिवार को किसी काम से घर से निकले थे। अचानक एक कुत्ते ने उन्हें काट लिया। उन्होंने स्थानीय आरडब्ल्यूए और नगर निगम को भी शिकायत की, लेकिन कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली। वह सेक्टर-22 के अस्पताल गए और टीका लगवाया। उन्होंने बताया कि कई साल पहले उनकी माता को भी कुत्ते ने काट लिया था। पूरे सेक्टर में कुत्तों का आतंक है। पार्क में टहलना भी मुश्किल हो गया है।

वर्जन
कुत्तों की समस्या से शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए विभाग ने योजना बनाई है। एक दो दिन में विभाग को दो गाड़ियां मिल जाएंगी। इसके बाद लोगों की तरफ से किए जाने वाले शिकायतों पर भी जल्द एक्शन लिया जा सकेगा और स्टेरिलाइजेशन की प्रक्रिया में भी तेजी जाएगी। - डॉ. विजय मोहन, एमओएच
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