विरोध करने पर उन्होंने लाठी-डंडों से पिटाई शुरू कर दी। किसी तरह वह भाग निकला और चचेरे भाई कुलदीप को फोन कर बुला लिया। इसके बाद उनकी बस्ती के काफी लोग बाइकों से वहां पहुंच गए, जिनको देखकर सभी आरोपी भाग गए। पुलिस ने तेजभान के बयान पर तीन नामजद सहित तीन अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 323, 506 व 3 एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गांव में फिलहाल शांति है। आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - जोगेंद्र राठी, डीएसपी नारनौंद।
गांव में पूर्ण रूप से शांति है। जिन युवकों के साथ झगड़ा हुआ था उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। - श्रीभगवान, नायब तहसीलदार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट।
गांव में पहले भी हो चुका है दंगा
वर्ष 2010 में गांव में एक समुदाय के बुजुर्ग व एक दिव्यांग लड़की की घर में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने के कारण जलने से मौत हो गई थी। समुदाय के लोगों ने इसका आरोप दूसरे समुदाय के लोगों पर लगाया था, जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच दंगा भड़क गया था। इस मामले में 113 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें 10 लोग जांच में निकाल दिए गए थे और 103 लोगों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला था।
इनमें पांच नाबालिग थे। बाकी 98 में से अदालत ने तीन लोगों को उम्रकैद, 5 लोगों को 5-5 साल की और 7 लोगों को 2-2 साल कैद की सजा हुई थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इसकी अपील दिल्ली के रोहिणी अदालत में की थी। इस पर 24 अगस्त 2018 को रोहिणी कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत 33 लोगों को दोषी करार दिया था। इनमें से 12 को उम्रकैद, 12 को 2-2 साल की कैद, बाकी को अंडरगोन की सजा सुनाई थी।