हैफेड में करोड़ों रुपये का घोटाला : आरोप, ऐसे राइस मिलों को धान अलाट किया जो अस्तित्व में ही नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति और विपणन संघ (हैफेड) में करोड़ों रुपये का धान और क्रेट घोटाला सामनेे आया है। आडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद सरकार ने करनाल हैफेड के डीएम ऊधम सिंह को हटा दिया है और उनको पंचकूला मुख्यालय पर अटैच कर दिया है। साथ ही इस मामले में 6 और अधिकारियों और कर्मचारी सरकार के रडार पर आ गए हैं। इन अधिकारियों की भूमिका को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो, हैफेड की आंतरिक विजिलेंस और सीएम फ्लाइंग की टीमें जांच में जुट गई हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में जल्द ही कुछ लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। करनाल के शेरगढ़ टापू निवासी हरपाल सिंह ने इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ-साथ विभागीय मंत्री महिपाल ढांडा को शिकायत दी थी। आरोप है कि हैफेड के अधिकारियों ने मिलीभगत के चलते ऐसी चावल मिलों को धान की पिराई के लिए धान दे दिया, जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। करनाल की रामा राइस मिल में बिजली का कनेक्शन नहीं होने के बावजूद उसे चावल तैयार करने के लिए धान दिया गया। घरौंडा की बजाज राइस मिल दो साल पहले बिक चुकी थी, लेकिन उसे चावल बनाने के लिए धान अलाट कर दिया गया। जांच में सामने आया कि 2019 से 2021 तक सहकारी समितियां करनाल के प्रबंधक पद पर रहते हुए डीएम हैफेड ऊधम सिंह ने पिता-पुत्र की एक ही फर्म को लगातार तीन साल तक वुडन क्रेट के करोड़ों रुपये के टेंडर देकर अनियमितताएं बरती हैं। सहकारिता मंत्री महिला ढांडा का कहना है कि विभागीय एजेंसिय़ों की जांच की रिपोर्ट तलब की गई है, जो भी दोषी होगा उसको बख्शा नहीं जाएगा।